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देहरादून। राजकीय मेडिकल कॉलेजों में अध्ययनरत पैरामेडिकल छात्रों ने शनिवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर अपनी विभिन्न समस्याओं से अवगत कराया। छात्रों ने इंटर्नशिप के दौरान स्टाइपेंड, छात्रावास, पुस्तकालय और यातायात समेत कई सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की।
इससे पहले 18 सितंबर को राज्य दर्जा मंत्री शंकर कोरंगा राजकीय मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी पहुंचे थे। उन्होंने पैरामेडिकल छात्रों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। इसके बाद छात्रों की मुख्यमंत्री से मुलाकात कराई गई।


19 सितंबर को मुख्यमंत्री धामी से मुलाकात के दौरान छात्रों ने बताया कि अनिवार्य इंटर्नशिप के दौरान उन्हें वर्तमान में कोई स्टाइपेंड नहीं दिया जाता है। छात्रों का कहना है कि पहले उत्तराखंड में पैरामेडिकल कोर्स संचालित होने के दौरान इंटर्नशिप के समय स्टाइपेंड की व्यवस्था थी। कोरोना काल के बाद इन कोर्सों को दोबारा शुरू किया गया…लेकिन इंटर्नशिप के दौरान स्टाइपेंड की सुविधा नहीं दी गई।
छात्रों ने अनिवार्य इंटर्नशिप के दौरान न्यूनतम 15 हजार रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड देने की मांग मुख्यमंत्री के सामने रखी।
इसके अलावा छात्रों ने पर्याप्त छात्रावास और सुविधायुक्त पुस्तकालय उपलब्ध कराने की मांग की। छात्रों का कहना है कि मेडिकल छात्रों की तरह पैरामेडिकल छात्रों के लिए भी पर्याप्त बस और यातायात सुविधा होनी चाहिए। उन्होंने शैक्षणिक और संस्थागत स्तर पर मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं को भी बेहतर करने की मांग की।
छात्रों ने फीस का मुद्दा भी मुख्यमंत्री के सामने उठाया। उनका कहना है कि सरकारी मेडिकल कॉलेज होने के बावजूद उनसे प्रतिवर्ष 50 हजार रुपये फीस ली जा रही है….जिससे आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।
छात्रों ने मुख्यमंत्री से सभी समस्याओं के समाधान और आवश्यक कार्रवाई की मांग की। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने छात्रों की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना।
पैरामेडिकल छात्र अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनमें रक्त और अन्य नमूनों की प्रयोगशाला जांच, एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई जैसी डायग्नोस्टिक सेवाओं से जुड़े कार्य तथा ऑपरेशन थिएटर में चिकित्सकों को आवश्यक सहयोग देना शामिल है।
