यूपी में निजी गाड़ी मालिकों को बड़ी राहत, 6 से 9 सीट वाले वाहनों के लिए अब नहीं जरूरी होगा सालाना फिटनेस सर्टिफिकेट
गाजियाबाद , 19 सितंबर 2026 । उत्तर प्रदेश में निजी वाहन मालिकों के लिए परिवहन विभाग ने बड़ा बदलाव किया है। अब ड्राइवर को छोड़कर 6 से 9 सीट तक की क्षमता वाले निजी गैर-परिवहन वाहनों के लिए केवल सीट क्षमता के आधार पर सालाना फिटनेस सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य नहीं होगा। परिवहन विभाग ने इस संबंध में पुराना आदेश निरस्त कर दिया है।
इस फैसले से प्रदेश में बड़ी संख्या में निजी वाहन मालिकों को राहत मिलेगी। खासकर इनोवा, स्कॉर्पियो, अर्टिगा, सफारी और इसी श्रेणी की अन्य बड़ी निजी गाड़ियों के मालिकों को हर साल फिटनेस प्रक्रिया के लिए आरटीओ जाने की जरूरत नहीं होगी।
परिवहन विभाग ने 2005 का आदेश निरस्त किया
परिवहन आयुक्त उत्तर प्रदेश की ओर से जारी नए आदेश में स्पष्ट किया गया है कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत गैर-परिवहन यानी निजी वाहनों पर सिर्फ सीट क्षमता के आधार पर फिटनेस की शर्त थोपना सही नहीं था। कानूनन केंद्र सरकार के पास ही गैर-परिवहन वाहनों के फिटनेस से जुड़े नियम तय करने का अधिकार है। इस कानूनी अड़चन का संज्ञान लेते हुए विभाग ने 12 दिसंबर, 2005 वाले आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। इससे प्रदेश भर के लाखों लोगों का समय और पैसा दोनों बचेगा।
12 दिसंबर 2005 का पुराना आदेश हुआ निरस्त
उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने 12 दिसंबर 2005 के उस परिपत्र को निरस्त कर दिया है, जिसके आधार पर ड्राइवर को छोड़कर 6 से 9 सीट वाले निजी वाहनों से फिटनेस प्रमाणपत्र मांगा जा रहा था।
नए निर्देश के बाद आरटीओ और एआरटीओ कार्यालय केवल वाहन की सीट क्षमता के आधार पर निजी गैर-परिवहन वाहन मालिकों को फिटनेस प्रमाणपत्र लेने के लिए बाध्य नहीं करेंगे।
इस बदलाव का सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जिनके पास 7, 8 या 9 सीट की क्षमता वाली निजी कार या SUV है। रिपोर्टों के मुताबिक, इस फैसले से दो लाख से अधिक वाहन मालिकों को राहत मिलने की बात कही गई है।
पहले निजी वाहन मालिकों को फिटनेस प्रक्रिया के लिए आरटीओ कार्यालय जाना पड़ता था। इसके चलते समय और अतिरिक्त खर्च दोनों होते थे। नए आदेश के बाद इस प्रक्रिया से राहत मिलेगी।
परिवहन विभाग ने कानून का हवाला दिया
परिवहन विभाग के मुताबिक, केवल सीट क्षमता के आधार पर गैर-परिवहन यानी निजी वाहनों के लिए फिटनेस प्रमाणपत्र अनिवार्य करना उचित नहीं था। केंद्र के मोटर वाहन कानून और संबंधित नियमों में नियमित फिटनेस व्यवस्था मुख्य रूप से परिवहन या व्यावसायिक वाहनों से जुड़ी है।
इसी कानूनी स्थिति की समीक्षा के बाद उत्तर प्रदेश ने पुरानी व्यवस्था को वापस लेने का फैसला किया। रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार से भी इस मुद्दे पर निर्देश मांगे गए थे।
नई व्यवस्था निजी गैर-परिवहन वाहनों पर लागू होगी। यानी ऐसे वाहन जो व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए पंजीकृत हैं और व्यावसायिक परिवहन के रूप में इस्तेमाल नहीं किए जाते।
ड्राइवर को छोड़कर 6 से 9 सीट तक की क्षमता वाले निजी वाहन इस बदलाव के दायरे में आएंगे। इसलिए वाहन मालिकों को अपनी गाड़ी की RC में दर्ज सीट क्षमता और वाहन की श्रेणी की जांच कर लेनी चाहिए।
15 साल पुराने वाहनों के मामले में अलग नियम
इस राहत का मतलब यह नहीं है कि हर परिस्थिति में निजी वाहनों को फिटनेस से पूरी तरह छूट मिल गई है। रिपोर्ट के अनुसार 15 वर्ष की आयु पूरी कर चुके निजी वाहनों के दोबारा पंजीकरण से संबंधित फिटनेस आवश्यकताएं लागू रह सकती हैं।
इसलिए वाहन मालिकों को वाहन की उम्र, पंजीकरण और इस्तेमाल की श्रेणी के आधार पर लागू नियमों की जानकारी रखनी चाहिए।
नए आदेश से 6 से 9 सीट वाले निजी वाहनों के मालिकों को सालाना फिटनेस प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आरटीओ या एआरटीओ कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी, जब तक कोई अन्य लागू नियम फिटनेस की मांग न करता हो।
इससे निजी वाहन मालिकों के लिए प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है। साथ ही परिवहन कार्यालयों पर भी ऐसे फिटनेस आवेदनों का बोझ कम हो सकता है।
अब क्या करना होगा?
निजी वाहन मालिकों को अपनी गाड़ी की सीट क्षमता, वाहन की श्रेणी और पंजीकरण की स्थिति की जानकारी सही रखनी चाहिए। यदि वाहन निजी गैर-परिवहन श्रेणी में आता है और ड्राइवर को छोड़कर उसकी क्षमता 6 से 9 सीट के बीच है, तो केवल सीट क्षमता के आधार पर सालाना फिटनेस प्रमाणपत्र मांगने की पुरानी व्यवस्था लागू नहीं होगी।
हालांकि, व्यावसायिक वाहनों और अन्य श्रेणियों पर लागू फिटनेस नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए वाहन मालिकों को निजी और परिवहन वाहन के बीच अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है।