अयोध्या , 11 अगस्त 2026 । अयोध्या स्थित राम मंदिर ट्रस्ट के नए CEO के चयन को लेकर अब पारदर्शिता का सवाल उठ खड़ा हुआ है। पूर्व IPS अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से CEO पद के लिए शॉर्टलिस्ट किए गए 18 अभ्यर्थियों के नाम सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका कहना है कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा संस्थान है, इसलिए इतने महत्वपूर्ण पद की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए।
5200 आवेदन में सिर्फ 18 का हुआ चयन
पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि राम मंदिर सीईओ पद के लिए देशभर से लगभग 5200 आवेदन प्राप्त हुए थे। इन आवेदनों की प्रारंभिक छंटाई के बाद केवल 18 अभ्यर्थियों को अंतिम साक्षात्कार के लिए चुना गया है। इन उम्मीदवारों को 11 और 12 अगस्त को अयोध्या बुलाया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें इस संबंध में उन्हें कोई व्यक्तिगत सूचना नहीं मिली है। अमिताभ ठाकुर ने कहा कि उन्हें अपने चयन या गैर-चयन को लेकर कोई व्यक्तिगत शिकायत नहीं है, लेकिन ट्रस्ट की अब तक की कार्यप्रणाली से पूरी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
तीन सदस्यीय समिति कर रही CEO का चयन
CEO चयन के लिए ट्रस्ट ने तीन सदस्यीय समिति गठित की है। इसकी अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली कर रहे हैं। समिति में डॉ. सुरेश हावड़े और सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी भी शामिल हैं। यही समिति उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग और इंटरव्यू के बाद अपनी सिफारिश ट्रस्ट के सामने रखेगी।
क्यों अहम है राम मंदिर CEO का पद?
राम मंदिर का संचालन केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या, दान और वित्तीय प्रबंधन, प्रशासनिक व्यवस्था, सुरक्षा, कर्मचारियों का प्रबंधन और विभिन्न विकास कार्यों के चलते CEO का पद बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसी वजह से इस पद के लिए प्रशासनिक और प्रबंधन अनुभव को प्रमुख योग्यता माना गया है। रिपोर्टों के अनुसार, आवेदन करने वालों में कई सेवानिवृत्त IAS और IPS अधिकारियों समेत वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल रहे हैं।
अब ट्रस्ट के सामने पारदर्शिता की चुनौती
18 उम्मीदवारों के इंटरव्यू के बीच अमिताभ ठाकुर की मांग ने चयन प्रक्रिया को लेकर सार्वजनिक चर्चा बढ़ा दी है। अब निगाह इस बात पर होगी कि ट्रस्ट 18 शॉर्टलिस्ट उम्मीदवारों के नाम सार्वजनिक करता है या नहीं और अंतिम चयन के बाद चयन प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी कितनी साझा की जाती है।
कुल मिलाकर, राम मंदिर CEO की नियुक्ति अब सिर्फ एक प्रशासनिक नियुक्ति नहीं रह गई है। करोड़ों श्रद्धालुओं से जुड़े इस संस्थान में पारदर्शी, योग्यता आधारित और जवाबदेह नियुक्ति प्रक्रिया की मांग लगातार जोर पकड़ रही है।