2036 ओलंपिक मेजबानी के लिए खेल मंत्री रेखा आर्या का संकल्प
कांवड़ यात्रा के जरिए करेंगी विशेष प्रार्थना
देहरादून, 04 अगस्त 2026 । उत्तराखंड की खेल मंत्री रेखा आर्या ने भारत को वर्ष 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी मिलने की कामना के साथ विशेष संकल्प लेने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि वह कांवड़ यात्रा के दौरान भगवान शिव की आराधना करेंगी और देश को 2036 ओलंपिक की मेजबानी मिलने तथा भारतीय खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना करेंगी। उनके इस संकल्प को खेल और आस्था के संगम के रूप में देखा जा रहा है।
हर की पौड़ी से शुरू होगी कांवड़ यात्रा
रेखा आर्या ने बताया कि कांवड़ यात्रा का शुभारंभ हरिद्वार स्थित हर की पौड़ी से होगा और इसका समापन ऋषिकेश के पावन वीरभद्र मंदिर में जलाभिषेक के साथ होगा। उन्होंने कहा कि भगवान भोलेनाथ के चरणों में जलाभिषेक कर भारत को वर्ष 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी मिलने और देश को खेलों के क्षेत्र में विश्व अग्रणी बनाने का संकल्प लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड सदैव राष्ट्रीय संकल्पों को ऊर्जा देने वाली भूमि रही है।
रेखा आर्या ने कहा कि भारत लगातार खेलों के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन लगातार बेहतर हो रहा है। उनका मानना है कि यदि भारत को 2036 ओलंपिक की मेजबानी का अवसर मिलता है, तो इससे खेल अधोसंरचना, पर्यटन, रोजगार और वैश्विक स्तर पर देश की प्रतिष्ठा को नई मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह आयोजन भारत के खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।
खेल मंत्री ने यह भी कहा कि देशभर में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने, खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने और युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित करने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। उनके अनुसार, ओलंपिक जैसे बड़े आयोजन की मेजबानी से देश में विश्वस्तरीय खेल सुविधाओं का विस्तार होगा और नई पीढ़ी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का बेहतर अवसर मिलेगा।
भारत ने 2036 ओलंपिक की मेजबानी की इच्छा पहले भी व्यक्त की है और इसके लिए आवश्यक तैयारियों तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन जुटाने की दिशा में प्रयास जारी हैं। ऐसे में रेखा आर्या का यह संकल्प खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। यदि भारत को 2036 ओलंपिक की मेजबानी मिलती है, तो इसे देश के खेल विकास और वैश्विक पहचान के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जाएगा।