उत्तराखंड: निठारी कांड से बरी होने के करीब 10 माह बाद सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में की आत्महत्या

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निठारी कांड से बरी होने के करीब 10 माह बाद सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में की आत्महत्या

अल्मोड़ा/मोलखाल। देश के चर्चित निठारी कांड से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट से बरी होने के करीब 10 माह बाद अल्मोड़ा जिले के स्याल्दे ब्लॉक के मंगलखाल गांव निवासी सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत हो गई। पुलिस जांच में इसे आत्महत्या का मामला बताया गया है।

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कोली कुछ दिन पहले ही अपने पैतृक गांव मंगलखाल आया था और इसके बाद हरिद्वार लौट गया था।
सुरेंद्र कोली करीब 21 साल जेल में रहा। निठारी कांड से जुड़े अंतिम लंबित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 11 नवंबर 2025 को उसकी दोषसिद्धि रद्द करते हुए उसे बरी कर दिया था। इसके साथ ही निठारी कांड से जुड़े उसके खिलाफ लंबित सभी आपराधिक मामलों का अंत हो गया था।

रिहाई के बाद हरिद्वार में शुरू की थी नई जिंदगी
रिहाई के बाद सुरेंद्र हरिद्वार में रहकर सामान्य जीवन शुरू करने की कोशिश कर रहा था। उसने वहां चाय की दुकान भी शुरू की थी। कुछ समय बाद वह अपने गांव मंगलखाल पहुंचा था, जहां परिवार ने पूजा-पाठ का कार्यक्रम रखा था। ग्रामीणों के मुताबिक इस दौरान उसका व्यवहार सामान्य था।

चार भाइयों में दूसरे नंबर पर था सुरेंद्र
परिवार के अनुसार सुरेंद्र चार भाइयों में दूसरे नंबर पर था। उसके पिता शाकुराम और मां कुंती देवी थीं। बड़ा भाई चंदन राम कोली और छोटा भाई हरीश कोली दिल्ली में रहते हैं, जबकि सबसे छोटा भाई आनंद राम कोली परिवार के साथ मासी में रहता है। कुछ समय गांव में रहने के बाद सुरेंद्र रोजगार की तलाश में दिल्ली चला गया था।

हरिद्वार में मौत की खबर से परिवार में मातम
रिपोर्ट के अनुसार, सुरेंद्र करीब तीन महीने से हरिद्वार में रह रहा था। वहां उसने सिडकुल क्षेत्र की दीपगंगा सोसाइटी में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी भी की थी और एक कंपनी में काम किया था। दिल्ली के नरेला निवासी धर्मेंद्र से उसकी कुछ दिन पहले ऋषिकेश में मुलाकात हुई थी। धर्मेंद्र के मुताबिक सुरेंद्र ने काम दिलाने की बात कही थी और बाद में उसे चाय की दुकान भी दिलाई थी।

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