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हल्द्वानी: हल्द्वानी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के तहत युवा महोत्सवों का आयोजन किया गया। हल्द्वानी महानगर के चार उपनगरों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों के बिंदुखत्ता और सूर्यादेवी खंड में आयोजित कार्यक्रमों में सैकड़ों युवाओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रमों का उद्देश्य युवाओं को राष्ट्र, समाज, संस्कृति, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ना रहा।
महाराणा प्रताप उपनगर में आयोजित कार्यक्रम में प्रांत संघचालक डॉ. बहादुर सिंह बिष्ट मुख्य वक्ता रहे। उन्होंने कहा कि किसी भी देश के लिए उसकी युवा शक्ति सबसे महत्वपूर्ण पूंजी होती है। युवाओं को अपनी ऊर्जा, प्रतिभा और क्षमताओं का इस्तेमाल राष्ट्र निर्माण और समाज के हित में करना चाहिए। उन्होंने युवाओं में अनुशासन, राष्ट्र के प्रति समर्पण और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने पर जोर दिया।


केशव उपनगर में मुख्य वक्ता सूरज ने युवाओं से व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों को समझने की अपील की। उन्होंने कहा कि सकारात्मक सोच और अपनी प्रतिभा के सही इस्तेमाल से युवा समाज में रचनात्मक बदलाव ला सकते हैं। साथ ही उन्होंने भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों से जुड़कर आगे बढ़ने का संदेश दिया।
महादेव उपनगर के कार्यक्रम में डॉ. नंदन ने शिक्षा के उद्देश्य को केवल रोजगार तक सीमित न रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ जिम्मेदार नागरिक का निर्माण भी जरूरी है। युवाओं से संस्कार, अनुशासन, सेवा भावना और सामाजिक सरोकारों को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया गया। उन्होंने कहा कि जागरूक और जिम्मेदार युवा समाज और राष्ट्र को मजबूत दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
बिंदुखत्ता खंड में नैनीताल विभाग के विभाग प्रचारक डॉ. नरेंद्र ने युवाओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति में युवाओं की भूमिका निर्णायक है। युवाओं को अपने अधिकारों के साथ राष्ट्र और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को भी समझना चाहिए। उन्होंने सेवा, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में युवाओं की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया।
वहीं सूर्यादेवी खंड में हल्द्वानी के जिला प्रचारक जितेंद्र ने युवाओं में नेतृत्व क्षमता और समाज के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने आसपास मौजूद सामाजिक चुनौतियों को समझकर उनके समाधान में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। सेवा, अनुशासन और राष्ट्रभाव को जीवन का हिस्सा बनाकर युवा समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन सकते हैं।
युवा महोत्सवों में विभिन्न शिक्षण संस्थानों के छात्र-छात्राओं और अन्य युवाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कार्यक्रमों में विभिन्न खेल गतिविधियां भी कराई गईं। खेलों के दौरान युवाओं में खासा उत्साह और ऊर्जा देखने को मिली।
आयोजकों के अनुसार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों के जरिए युवाओं को राष्ट्र और समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारियों के साथ भारतीय संस्कृति, सेवा भावना और सामाजिक सरोकारों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. नवीन शर्मा नगर प्रचार प्रमुख राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, हल्द्वानी
