सीएम धामी की पैरवी के बाद उत्तराखंड में सड़क परियोजनाओं को मंजूरी, 1490 गांव होंगे कनेक्ट

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देहरादून। उत्तराखंड के दूरस्थ और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में सड़क कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना यानी पीएमजीएसवाई के तहत लगातार काम किया जा रहा है। पहाड़ों में सड़क पहुंचने से ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन आसान हुआ है। इसका सीधा लाभ शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पर्यटन और स्थानीय कारोबार से जुड़े लोगों को मिल रहा है।

पीएमजीएसवाई के तीन चरणों के तहत उत्तराखंड में अब तक 21,915 किलोमीटर लंबाई की 2,826 सड़कों का निर्माण पूरा हो चुका है। इन सड़कों के निर्माण पर करीब 11,595 करोड़ रुपये की लागत आई है। योजना से प्रदेश के 1,860 गांवों को सड़क सुविधा का लाभ मिला है।

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अब पीएमजीएसवाई चौथे चरण में प्रवेश कर चुकी है। चौथे चरण के पहले चक्र में 309 गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसके लिए 1,707 करोड़ रुपये की लागत से 1,228.20 किलोमीटर लंबाई की 184 सड़कों का निर्माण किया जा रहा है।

सरकार के अनुसार पीएमजीएसवाई के चौथे चरण में उत्तराखंड के सभी 13 जिलों में सड़क निर्माण किया जाएगा। इस चरण के तहत कुल 1,490 गांवों को सड़क नेटवर्क से जोड़ने और 9,344 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण करने की योजना है।

मुख्यमंत्री धामी की केंद्र से पैरवी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का फोकस प्रदेश के दूरस्थ और दुर्गम गांवों को मुख्य सड़क नेटवर्क से जोड़ने पर है। सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए पीएमजीएसवाई के माध्यम से अधिक से अधिक गांवों तक सड़क पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।

राज्य सरकार के अनुसार मुख्यमंत्री धामी की ओर से केंद्र सरकार के समक्ष लगातार पैरवी की गई…जिसके बाद प्रदेश में पीएमजीएसवाई के तहत सड़क परियोजनाओं को मंजूरी मिली और योजना का विस्तार आगे बढ़ा।

पहले चक्र में पौड़ी के सबसे ज्यादा 68 गांव जुड़ेंगे

पीएमजीएसवाई-4 के पहले चक्र में पौड़ी गढ़वाल जिले के सबसे ज्यादा 68 गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने का काम किया जा रहा है। इसके अलावा अल्मोड़ा और टिहरी के 47-47 गांव, बागेश्वर के 35 और पिथौरागढ़ के 25 गांवों को सड़क सुविधा का लाभ मिलेगा।

नैनीताल और उत्तरकाशी के 24-24 गांव, चमोली के 17, देहरादून और रुद्रप्रयाग के 10-10 तथा हरिद्वार के दो गांव भी पहले चक्र में सड़क नेटवर्क से जोड़े जा रहे हैं।

पीएमजीएसवाई-चतुर्थ चरण में जिलेवार आंकड़े

पिथौरागढ़ में 249 गांवों के लिए 1,819.6 किलोमीटर, अल्मोड़ा में 221 गांवों के लिए 1,395.5 किलोमीटर और पौड़ी में 185 गांवों के लिए 1,227.8 किलोमीटर लंबी सड़क का प्रावधान है।

चमोली में 175 गांवों के लिए 996.15 किलोमीटर, टिहरी में 168 गांवों के लिए 941.5 किलोमीटर और उत्तरकाशी में 112 गांवों के लिए 721.99 किलोमीटर सड़क का लक्ष्य रखा गया है।

रुद्रप्रयाग में 111 गांवों को 469.2 किलोमीटर, बागेश्वर में 101 गांवों को 569.82 किलोमीटर और नैनीताल में 67 गांवों को 399.55 किलोमीटर सड़क नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।

देहरादून में 52 गांवों के लिए 390 किलोमीटर, चंपावत में 39 गांवों के लिए 387.3 किलोमीटर और ऊधमसिंह नगर में नौ गांवों के लिए 22.3 किलोमीटर लंबाई की सड़क का प्रावधान है। हरिद्वार में एक गांव के लिए 3.1 किलोमीटर सड़क की योजना है।

जिलेवार आंकड़े एक नजर में*

जनपद | गांवों की संख्या | सड़कों की लंबाई

पिथौरागढ़ | 249 | 1819.6 किमी अल्मोड़ा | 221 | 1395.5 किमी पौड़ी गढ़वाल | 185 | 1227.8 किमी चमोली | 175 | 996.15 किमी टिहरी गढ़वाल | 168 | 941.5 किमी उत्तरकाशी | 112 | 721.99 किमी रुद्रप्रयाग | 111 | 469.2 किमी बागेश्वर | 101 | 569.82 किमी नैनीताल | 67 | 399.55 किमी देहरादून | 52 | 390 किमी चंपावत | 39 | 387.3 किमी ऊधमसिंह नगर | 9 | 22.3 किमी हरिद्वार | 1 | 3.1 किमी

कुल गांव: 1490 कुल सड़क लंबाई: 9344 किलोमीटर

सड़क से आसान होगी ग्रामीणों की राह

पीएमजीएसवाई के तहत सड़क सुविधा मिलने से दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को आवागमन में सुविधा मिलने की उम्मीद है। सड़क नेटवर्क बेहतर होने से विद्यार्थियों को स्कूल और अन्य शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंचने में आसानी होगी। वहीं मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भी सुविधा मिलेगी।

किसानों के लिए भी सड़क कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण है। इससे कृषि उत्पादों को नजदीकी बाजार और मंडियों तक पहुंचाने में आसानी होगी। इसके अलावा सड़क सुविधा से पर्यटन गतिविधियों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश सरकार दूरदराज के सभी गांवों को सड़क नेटवर्क से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। पीएमजीएसवाई सड़कों के निर्माण से दूरस्थ क्षेत्रों की राह आसान होने के साथ ही पर्यटन, कृषि और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिली है। विद्यार्थियों को कठिन रास्ता तय नहीं करना पड़ता। बीमारों को समय से अस्पताल पहुंचाया जा रहा है और किसान अपनी फसल को मंडियों तक पहुंचा पा रहे हैं।

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