उत्तराखंड: गिर्दा के गीतों से लेकर ग्रामीणों की आवाज तक, बिंदुखत्ता में राजस्व ग्राम आंदोलन ने पकड़ी रफ्तार

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बिंदुखत्ता: राजस्व ग्राम की मांग को लेकर बिंदुखत्ता में चल रही पदयात्रा सोमवार को खुरियाखत्ता पहुंची। इस दौरान हुड़के की थाप और जनगीतों ने आंदोलन में नया जोश भर दिया। गिर्दा और शेरदा अनपढ़ के लोकप्रिय जनगीतों के साथ ग्रामीणों ने राजस्व ग्राम की मांग को लेकर अपनी आवाज बुलंद की।

पदयात्रा के दौरान गिर्दा के जनगीतों के साथ शेरदा अनपढ़ के गीत भी गूंजे। ग्रामीणों ने अपनी ओर से तैयार किए गए गीतों के जरिए भी सरकार से बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मांग उठाई।

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गीत-संगीत के जरिए ग्रामीणों को राजस्व ग्राम की मांग और आंदोलन के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही 27 सितंबर को प्रस्तावित विशाल रैली में अधिक से अधिक लोगों से शामिल होने की अपील की गई।

आंदोलनकारियों का कहना है कि बिंदुखत्ता की बसासत वर्ष 1932 से पहले की है और इसके समर्थन में प्रमाण भी उपलब्ध हैं। इसके बावजूद अब तक राजस्व ग्राम की अधिसूचना जारी नहीं हुई है।

वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि 27 सितंबर तक सरकार की ओर से अधिसूचना जारी नहीं की गई…तो विशाल जनसभा और रैली के बाद आंदोलन को और तेज किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर क्रमिक अनशन और आमरण अनशन शुरू करने की बात भी कही गई।

पदयात्रा में महिलाओं, पुरुषों और बच्चों समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। इस दौरान उमेश भट्ट, अर्जुन नाथ गोस्वामी, रमेश गोस्वामी, दरबान सिंह कोश्यारी, खुशाल सिंह कोश्यारी, भरत नेगी, दीपक जोशी, दुर्गा सिंह मेहता, कर्म सिंह कोरंगा, संध्या डालाकोटी, उर्मिला धामी, नंदन बोरा, प्रकाश उत्तराखंडी, नंदन जग्गी, सोहनलाल, दौलत सिंह कोरंगा, दीपक रौतेला, कुंवर सिंह पवार और भूपेश जोशी समेत कई लोग मौजूद रहे।

राजस्व ग्राम की मांग को लेकर बिंदुखत्ता में आंदोलन लगातार आगे बढ़ रहा है। ग्रामीणों ने साफ किया है कि मांग पूरी होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

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