विश्व पर्यटन दिवस पर उत्तराखंड में पर्यटन विकास पर जोर, सतपाल महाराज और सौरभ बहुगुणा हुए शामिल

देहरादून, 29  सितंबर 2026 ।  विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर उत्तराखंड में आयोजित कार्यक्रम में पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज और मंत्री सौरभ बहुगुणा शामिल हुए। इस दौरान राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय लोगों को इससे जोड़ने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने पर चर्चा हुई। सतपाल महाराज ने कहा कि सरकार का फोकस ग्रामीण पर्यटन को मजबूत करने पर है, ताकि स्थानीय परिवार सीधे पर्यटन अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन सकें।

उत्तराखंड में पर्यटन को केवल प्रमुख धार्मिक और पर्यटक स्थलों तक सीमित रखने के बजाय गांवों और स्थानीय समुदायों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। इससे होमस्टे, स्थानीय उत्पाद, हस्तशिल्प, खान-पान और अन्य ग्रामीण गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

‘स्थानीय परिवारों को पर्यटन अर्थव्यवस्था से जोड़ने का प्रयास’

पर्यटन मंत्री ने कहा कि राज्य का होमस्टे मॉडल इस परिवर्तन की महत्वपूर्ण मिसाल बनकर उभरा है। दीनदयाल उपाध्याय गृह आवास विकास योजना और अतिथि उत्तराखंड गृह आवास योजना के माध्यम से स्थानीय परिवारों को पर्यटन अर्थव्यवस्था से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इससे पर्यटकों को गांवों की जीवनशैली, स्थानीय भोजन और संस्कृति का अनुभव मिलता है, वहीं ग्रामीण परिवारों के लिए आय और स्वरोजगार के अवसर बनते हैं।

सतपाल महाराज ने पर्यटन क्षेत्र को स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार से जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियां बढ़ने से स्थानीय परिवारों के लिए आय के नए स्रोत तैयार हो सकते हैं। खासकर युवाओं को पर्यटन, आतिथ्य, गाइड सेवा, होमस्टे और अन्य संबंधित क्षेत्रों में काम के अवसर मिल सकते हैं।

उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में सरकार की ओर से स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाने की कोशिश को पर्यटन के विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है।

पर्यटन और कौशल विकास को जोड़ने की कोशिश

कार्यक्रम में मंत्री सौरभ बहुगुणा ने पर्यटन और कौशल विकास को एक-दूसरे का पूरक बताया। उन्होंने युवाओं को केवल नौकरी तलाशने के बजाय रोजगार पैदा करने की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर दिया। पर्यटन क्षेत्र में प्रशिक्षित युवाओं के लिए स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर भी तैयार हो सकते हैं।

ग्रामीण पर्यटन के विस्तार के साथ युवाओं को स्थानीय स्तर पर गाइडिंग, होटल और होमस्टे प्रबंधन, फूड सर्विस, एडवेंचर टूरिज्म और डिजिटल प्रमोशन जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण देने की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।

विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर सतपाल महाराज ने उत्तराखंड में नए आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन सर्किट विकसित करने की योजनाओं का भी उल्लेख किया। इनमें ‘ऑरिजिन्स ऑफ द गंगा’, ‘महाभारत ट्रेल’ और ‘स्टोरी ऑफ शिवा’ जैसे थीम आधारित सर्किट शामिल हैं। इसके अलावा एडवेंचर, वेलनेस और इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा देने की बात कही गई है।

इस तरह उत्तराखंड में पर्यटन को धार्मिक यात्राओं के साथ-साथ संस्कृति, प्रकृति, साहसिक गतिविधियों और वेलनेस से जोड़ने की दिशा में विस्तार देने की कोशिश की जा रही है।

होमस्टे और ग्रामीण पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

उत्तराखंड में होमस्टे को पर्यटन विकास का महत्वपूर्ण माध्यम माना जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटकों के ठहरने की सुविधाएं बढ़ने से स्थानीय परिवारों को सीधे आर्थिक लाभ मिल सकता है। इससे स्थानीय भोजन, संस्कृति और पारंपरिक जीवनशैली को भी पर्यटकों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।

पर्यटन विभाग की ओर से होमस्टे, ट्रेकिंग और आध्यात्मिक सर्किट जैसे क्षेत्रों पर पहले से जोर दिया जा रहा है।

युवाओं और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर नजर

विश्व पर्यटन दिवस के कार्यक्रम में पर्यटन को युवाओं के कौशल और रोजगार से जोड़ने का संदेश प्रमुख रहा। सरकार का जोर ऐसे पर्यटन मॉडल पर है, जिसमें पर्यटक आकर्षण बढ़ाने के साथ स्थानीय लोगों की आर्थिक भागीदारी भी सुनिश्चित हो।

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में ग्रामीण पर्यटन के विस्तार से छोटे व्यवसाय, स्थानीय उत्पादों की बिक्री और होमस्टे जैसी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है। हालांकि, इसके लिए बेहतर कनेक्टिविटी, प्रशिक्षण, पर्यटक सुविधाओं और पर्यावरणीय संतुलन पर भी लगातार ध्यान देना जरूरी होगा।

विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर सामने आई योजनाओं से संकेत मिलता है कि उत्तराखंड पर्यटन को धार्मिक यात्राओं से आगे बढ़ाकर ग्रामीण, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, साहसिक, वेलनेस और इको-टूरिज्म के व्यापक मॉडल के रूप में विकसित करने पर जोर दे रहा है। सतपाल महाराज और सौरभ बहुगुणा की मौजूदगी में पर्यटन और युवाओं के रोजगार को जोड़ने पर दिया गया जोर इसी दिशा का हिस्सा रहा।

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