ढाका/इस्लामाबाद, 29 सितंबर 2026 । बांग्लादेश इस समय बिजली और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। देश के पावर सिस्टम में पर्याप्त बैकअप नहीं बचा है और गैस, कोयला तथा लिक्विड फ्यूल आधारित बिजली उत्पादन पर दबाव बना हुआ है। सितंबर में अडानी पावर के गोड्डा प्लांट की एक यूनिट बंद होने के बाद बांग्लादेश की बिजली सप्लाई पर अतिरिक्त दबाव आया था।
बिजली की मांग और उपलब्ध सप्लाई के बीच अंतर के कारण कई इलाकों में लोड शेडिंग की स्थिति बनी। बांग्लादेश के Power Grid के आंकड़ों में भी सितंबर के दौरान कई घंटों में मांग और सप्लाई के बीच अंतर दर्ज हुआ।
इसी बीच पाकिस्तान ने बांग्लादेश के लिए न्यूक्लियर फ्यूल लेकर जा रही रूसी फ्लाइट को अपने एयरस्पेस से गुजरने की मंजूरी नहीं दी।
यह फ्यूल बांग्लादेश के रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए भेजा जा रहा था। इसका इस्तेमाल प्लांट में बिजली पैदा करने के लिए होना है।
फ्लाइट को 24 सितंबर को ढाका पहुंचना था, लेकिन पाकिस्तान की मंजूरी नहीं मिलने के कारण फ्यूल की डिलीवरी टल गई है।
पाकिस्तान ने रूसी विमान को एयरस्पेस देने से किया इनकार
इसी बीच 29 सितंबर को पाकिस्तान से जुड़ा एक अलग घटनाक्रम सामने आया। रूस से बांग्लादेश के रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के लिए परमाणु ईंधन लेकर जा रही कार्गो फ्लाइट को पाकिस्तान ने अपने एयरस्पेस से गुजरने की अनुमति नहीं दी।
इससे रूपपुर संयंत्र की यूनिट-2 के लिए होने वाली यूरेनियम ईंधन की निर्धारित डिलीवरी में देरी हुई। पाकिस्तान ने बाद में इस फैसले को तकनीकी और प्रक्रियात्मक कारणों से जुड़ा बताया।
क्या पाकिस्तान की रुकावट से बिजली संकट पैदा हुआ?
यहां दोनों घटनाओं को अलग-अलग समझना जरूरी है। पाकिस्तान द्वारा रूसी विमान को एयरस्पेस की अनुमति नहीं देने से रूपपुर परमाणु संयंत्र के लिए ईंधन परिवहन प्रभावित हुआ है, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों में मौजूदा बांग्लादेश बिजली संकट की मुख्य वजह सिर्फ यह घटना नहीं बताई गई है।
बांग्लादेश के बिजली संकट के पीछे गैस की उपलब्धता में कमी, कई पावर प्लांट का क्षमता से कम उत्पादन और कुछ प्रमुख इकाइयों में तकनीकी समस्याएं पहले से मौजूद हैं।
अडानी पावर की यूनिट बंद होने से भी बढ़ा दबाव
सितंबर में भारत के झारखंड स्थित अडानी पावर के गोड्डा प्लांट की एक यूनिट तकनीकी समस्या के कारण बंद हुई थी। इससे बांग्लादेश को मिलने वाली बिजली की मात्रा में बड़ी कमी आई।
एक समय दोनों यूनिट से करीब 1,200 मेगावाट से अधिक बिजली मिल रही थी, जबकि एक यूनिट बंद होने पर सप्लाई लगभग आधी रह गई थी। बाद में यूनिट दोबारा शुरू हुई, लेकिन उसी दौरान बांग्लादेश के रामपाल पावर प्लांट की एक यूनिट भी बंद हो गई।
बांग्लादेश के बिजली उत्पादन में गैस आधारित प्लांट महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। रिपोर्टों के मुताबिक गैस सप्लाई में गिरावट के कारण कई गैस आधारित पावर प्लांट अपनी पूरी क्षमता से बिजली नहीं बना पा रहे थे।
अगस्त में LNG सप्लाई में तेज गिरावट के बाद देश के कई हिस्सों में बिजली कटौती बढ़ गई थी। कुछ क्षेत्रों में बिजली वितरण अधिकारियों को सार्वजनिक नाराजगी के बीच पुलिस सुरक्षा तक मांगनी पड़ी थी।
पावर सिस्टम में बैकअप की कमी
बांग्लादेश के Power Development Board से जुड़ी रिपोर्टों में यह भी सामने आया कि देश के पावर सिस्टम के पास पर्याप्त प्रभावी बैकअप उपलब्ध नहीं था। ऐसे में किसी बड़े पावर प्लांट की यूनिट बंद होने पर दूसरी इकाइयों से तुरंत उसकी भरपाई करना मुश्किल हो रहा है।
यही वजह है कि तकनीकी खराबी, ईंधन की कमी और मांग बढ़ने की स्थिति में बिजली संकट तेजी से गहरा सकता है।
रूपपुर परमाणु संयंत्र पर क्यों है नजर?
रूपपुर बांग्लादेश का पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र है और इसकी यूनिट-2 के लिए रूस से परमाणु ईंधन की आपूर्ति की जा रही है। पाकिस्तान के एयरस्पेस फैसले के कारण ईंधन लेकर जा रही उड़ान की यात्रा प्रभावित हुई है।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में पाकिस्तान ने इसे राजनीतिक कदम के तौर पर नहीं बल्कि तकनीकी और प्रक्रियात्मक समस्या के रूप में बताया है। इसलिए इस घटना को सीधे बांग्लादेश के मौजूदा बिजली संकट का एकमात्र कारण बताना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।
आगे क्या होगा?
बांग्लादेश के लिए तत्काल चुनौती बिजली उत्पादन और वितरण में मांग-सप्लाई के अंतर को कम करना है। इसके लिए गैस सप्लाई, कोयले की उपलब्धता और बंद पावर यूनिटों को जल्द बहाल करना अहम होगा।
वहीं, रूपपुर परमाणु संयंत्र के लिए ईंधन की डिलीवरी में हुई देरी अलग लॉजिस्टिक और अंतरराष्ट्रीय परिवहन मुद्दा है। पाकिस्तान के एयरस्पेस फैसले के बाद इस आपूर्ति की अगली व्यवस्था पर भी नजर रहेगी।