₹10 हजार की शिकायत से खुला करोड़ों का साइबर फ्रॉड, बैंक मैनेजर समेत 6 आरोपी गिरफ्तार

नई दिल्ली, 29  जुलाई 2026 । महज ₹10 हजार की साइबर ठगी की शिकायत ने एक बड़े वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश कर दिया। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आई छोटी-सी शिकायत ने जांच एजेंसियों को ऐसे साइबर फ्रॉड नेटवर्क तक पहुंचा दिया, जहां करोड़ों रुपये के अवैध लेनदेन का खुलासा हुआ। मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने एक बैंक मैनेजर सहित छह लोगों को गिरफ्तार किया है।

गिरोह के भंडाफोड़ के बाद बरामद 248 बैंक खातों के जरिए 70 करोड़ से अधिक के लेन-देन का पता चला है। ये खाते देशभर के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज 156 साइबर ठगी की शिकायतों से जुड़े पाए गए, जिनमें करीब 20 करोड़ रुपये की ठगी हुई थी। अब तक 56 लाख की राशि फ्रीज की जा चुकी है। जांच में पता चला कि गिरोह के तार दुबई और ब्रिटेन तक जुड़े हैं। भारत में फरार सरगना और यूएई में बैठे मास्टरमाइंड की तलाश जारी है।

  • 4 लोगों को किया गया बाउंड डाउन, ये चारों एक प्राइवेट बैंक के अधिकारी
  • इस गिरोह के ब्रिटेन और दुबई तक जुड़े हुए हैं तार, मास्टर माइंड की है तलाश

3-4 साल से सक्रिय था सिंडिकेट

डीसीपी सेंट्रल रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि जांच में सामने आया कि यह गिरोह पिछले 3 से 4 वर्षों से भारत के अलावा दुबई और ब्रिटेन में सक्रिय साइबर ठगों को कॉरपोरेट करंट बैंक अकाउंट उपलब्ध करा रहा था। मामले में सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक के मैनेजर कुंदन कुमार को गिरफ्तार किया गया है, जबकि इंडसइंड बैंक के चार अधिकारियों/सहयोगियों को हिरासत में लेकर कानूनी कार्रवाई (बाउंड डाउन) की गई है। पुलिस ने गिरोह से 248 बैंक अकाउंट किट, 38 सिम कार्ड, 22 मोबाइल फोन, 28 फर्जी कंपनी की मुहरें, 55 डेबिट/क्रेडिट कार्ड, 1 लाख कैश और एक मारुति ब्रेजा कार बरामद की है।

जांच के दौरान पता चला कि साइबर ठगी से जुड़े गिरोह कथित तौर पर बैंक खातों का दुरुपयोग कर ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर रहे थे। आरोप है कि इस नेटवर्क में बैंकिंग प्रणाली का गलत इस्तेमाल कर फर्जी या संदिग्ध लेनदेन को अंजाम दिया जाता था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बैंक दस्तावेज, मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, चेकबुक और अन्य डिजिटल साक्ष्य भी बरामद किए हैं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती शिकायत की जांच के दौरान कई संदिग्ध बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की कड़ियां सामने आईं। इसके बाद तकनीकी विश्लेषण और बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच के आधार पर पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को निशाना बनाया और कुल कितनी रकम की ठगी की गई।

अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक, QR कोड या ओटीपी साझा करने से बचें। यदि साइबर ठगी का शिकार हों तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या संबंधित साइबर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।

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