देहरादून, 21 सितंबर 2026 । उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी रविवार को चमोली जिले के दौरे पर बदरीनाथ के समीप स्थित बामणी गांव पहुंचे। यहां उन्होंने ग्रामीणों से मुलाकात करने के साथ स्थानीय महिलाओं के पारंपरिक छाछनी नृत्य में भी हिस्सा लिया। पारंपरिक वेशभूषा में महिलाओं को लोकगीतों पर नृत्य करते देखकर मुख्यमंत्री उनके बीच पहुंचे और उनके साथ नृत्य किया।
इस दौरान महिलाओं ने पारंपरिक गीतों के जरिए मां नंदा देवी का स्मरण किया। मुख्यमंत्री ने भी इस लोक परंपरा में सहभागी बनकर मां नंदा देवी का आशीर्वाद लिया। उन्होंने महिलाओं की सांस्कृतिक प्रस्तुति की सराहना करते हुए लोक संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करने पर जोर दिया।
सीएम धामी ने सोशल मीडिया पर लिखा पोस्ट
इस दौरान सीएम धामी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर की। उन्होंने पोस्ट में लिखा कि बामणी गांव, चमोली में मां नंदा देवी मंदिर में पूजा-अर्चना कर मां नंदा से समस्त प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि एवं आरोग्यपूर्ण जीवन की कामना की। इस अवसर पर स्थानीय लोगों से आत्मीय भेंट कर उनका कुशलक्षेम जाना। विशेष रूप से मातृशक्ति से मिले अपार स्नेह एवं आशीर्वाद ने मन को भाव-विभोर कर दिया। मातृशक्ति के साथ चाचणी नृत्य में सम्मिलित होकर देवभूमि की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं के रंग में रंगने का भी अवसर मिला।
लोकगीतों में मां नंदा देवी का स्मरण
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक लोकगीत प्रस्तुत किए। इन गीतों के माध्यम से मां नंदा देवी का स्मरण किया गया। मुख्यमंत्री ने भी इस सांस्कृतिक परंपरा में हिस्सा लेते हुए मां नंदा देवी से प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना की।
धामी ने महिलाओं की प्रस्तुति की सराहना की और उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोकगीत और लोकनृत्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि पहाड़ी समाज की परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का माध्यम भी हैं।
‘लोक संस्कृति उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान’
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति, परंपराएं और लोक कलाएं प्रदेश की विशिष्ट पहचान हैं। इन परंपराओं को संरक्षित करना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। उनके मुताबिक, ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और स्थानीय विरासत से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
बामणी गांव में ग्रामीणों से भी किया संवाद
मुख्यमंत्री ने बामणी गांव में स्थानीय लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याओं और क्षेत्र से जुड़े विषयों की जानकारी ली। इस दौरान ग्रामीणों ने भी मुख्यमंत्री के साथ अपने अनुभव साझा किए।
मुख्यमंत्री का यह दौरा धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से भी जुड़ा रहा। बामणी गांव के अलावा उन्होंने बदरीनाथ धाम में पूजा-अर्चना की और स्थानीय लोगों तथा श्रद्धालुओं से मुलाकात की।
बदरीनाथ क्षेत्र में सांस्कृतिक गतिविधियों का दौर
मुख्यमंत्री का दौरा ऐसे समय हुआ जब बदरीनाथ क्षेत्र में धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियां भी जारी हैं। 19 और 20 सितंबर को बदरीनाथ में देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें उत्तराखंड के लोकनृत्य, संगीत, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पाद और पारंपरिक व्यंजनों को प्रदर्शित किया गया।
इस तरह बामणी गांव में छाछनी नृत्य में मुख्यमंत्री की भागीदारी ने भी स्थानीय लोक परंपराओं को सार्वजनिक मंच पर सामने लाने का अवसर दिया। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर स्पष्ट किया कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता है।