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देहरादून। पछुवा दून क्षेत्र में सरकारी जमीन पर धार्मिक स्थलों के निर्माण और अतिक्रमण से जुड़ा मामला सामने आया है। प्रशासनिक स्तर पर हुई जांच में कई मस्जिद, मदरसे और ईदगाह ऐसी जमीनों पर बने होने की जानकारी सामने आने की बात कही गई है…जिनका संबंध ग्राम समाज, सिंचाई विभाग और वन विभाग जैसी सरकारी जमीनों से बताया जा रहा है।
मामले में जिला प्रशासन और पुलिस की ओर से जानकारी जुटाए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्टों में सामने आए तथ्यों का सत्यापन भी किया जा रहा है। हालांकि संबंधित जमीनों के स्वामित्व और निर्माण की वैधता का अंतिम निर्धारण राजस्व अभिलेखों और सक्षम अधिकारियों की जांच के आधार पर ही किया जाएगा।


कई स्थानों पर सरकारी जमीन पर निर्माण का दावा
उपलब्ध जानकारी के अनुसार विकासनगर परगना क्षेत्र में कुछ धार्मिक स्थलों के सरकारी भूमि पर बने होने का दावा किया गया है। इनमें कुल्हाल की आइशा मस्जिद, धौला तप्पड़ की कूबा मस्जिद, मटक माजरी की जामा मस्जिद, कुंजा क्षेत्र की ईदगाह, ढकरानी की मोमिनी मस्जिद…और मस्जिद-मदरसा अस्लामिया अरबिया मसीहूल उलूम सहित अन्य निर्माण शामिल बताए गए हैं।
इसके अलावा बरोटीवाला की मस्जिद फातिमा तथा ढकरानी, बाबूगढ़, जीवनगढ़, हरबर्टपुर, कुंजा और डाक्टरगंज-नवाबगढ़ क्षेत्र की ईदगाहों को लेकर भी सरकारी भूमि पर निर्माण होने के दावे किए गए हैं।
निर्माण की अनुमति और जमीन के रिकॉर्ड की जांच
मामले में यह भी सवाल उठाया गया है कि संबंधित निर्माणों के लिए जमीन की लीज, स्वामित्व और निर्माण अनुमति से जुड़े दस्तावेज क्या हैं। प्रशासन द्वारा राजस्व रिकॉर्ड और संबंधित विभागों से प्राप्त जानकारी के आधार पर इन मामलों की जांच की जा रही है।
कुछ संपत्तियों को वक्फ संपत्ति बताए जाने का मामला भी सामने आया है। ऐसे मामलों में जमीन के मूल स्वामित्व और वक्फ रिकॉर्ड में दर्ज होने की प्रक्रिया की जांच की जरूरत बताई गई है।
वक्फ संपत्तियों पर भी कब्जे की शिकायत
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड की ओर से देहरादून जिला प्रशासन को वक्फ संपत्तियों पर अतिक्रमण की शिकायत किए जाने की जानकारी है। बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स के अनुसार कुछ स्थानों पर बाहरी राज्यों से आए लोगों द्वारा वक्फ संपत्तियों पर कब्जे की शिकायत मिली है। उनका कहना है कि कुछ कब्रिस्तान की जमीन भी अतिक्रमण से प्रभावित हुई है।
डीएम आशीष चौहान के अनुसार वक्फ बोर्ड की शिकायत पर कार्रवाई की जा रही है। संबंधित स्थानों पर नोटिस और मार्किंग की कार्रवाई की गई है। प्रशासन ने लोगों से अतिक्रमण स्वयं हटाने की अपील भी की है।
राजनीतिक संरक्षण के आरोप भी उठे
मामले को लेकर कुछ लोगों की ओर से पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान राजनीतिक संरक्षण मिलने के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस जानकारी में नहीं है। इसलिए किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल की भूमिका को जांच के निष्कर्ष के बिना तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।
वहीं क्षेत्र में धार्मिक स्थलों की संख्या, जमीन के रिकॉर्ड और जनसंख्या में बदलाव से जुड़े दावों को लेकर भी अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं। ऐसे दावों की पुष्टि के लिए आधिकारिक जनगणना, राजस्व अभिलेख और अन्य सरकारी आंकड़ों को आधार बनाना जरूरी होगा।
फिलहाल प्रशासन की जांच का मुख्य फोकस सरकारी और वक्फ संपत्तियों पर हुए संभावित अतिक्रमण की पहचान, जमीन के दस्तावेजों की जांच और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई पर है।
