प्रशांत किशोर का ECI पर बड़ा आरोप
बोले- 2021 से ही उठ रहे थे सवाल, चुनाव में BJP को मिल रहा अनुचित फायदा
पटना , 26 सितंबर 2026 । जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने एक बार फिर भारत निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए हैं। शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को पत्रकारों से बातचीत में किशोर ने दावा किया कि चुनाव आयोग के रवैये से भारतीय जनता पार्टी को अनुचित लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उन्होंने 2021 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद ही सवाल उठाए थे, चुनाव आयोग पूरी तरह भाजपा के पक्ष में लगा है। जहां करीबी टक्कर है, वहां चुनाव आयोग की मदद से ये चुनाव जीत रहे हैं।
प्रशांत किशोर ने कहा कि 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए थे। उस समय वह तृणमूल कांग्रेस के चुनाव अभियान से जुड़े थे।
किशोर के मुताबिक, उन्होंने तब दावा किया था कि अगर चुनाव पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से होते तो भाजपा की सीटों की संख्या 50 से अधिक नहीं होती। उन्होंने आयोग की कार्यप्रणाली से भाजपा को लाभ मिलने का आरोप लगाया था।
हालांकि, ये प्रशांत किशोर के राजनीतिक दावे हैं। इन्हें चुनाव आयोग द्वारा स्थापित तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।
चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप
किशोर ने आरोप लगाया कि करीबी मुकाबले वाली सीटों पर चुनावी प्रक्रिया का संचालन भाजपा के पक्ष में जाता है। उन्होंने मतदाता सूची, मतदान प्रक्रिया और आचार संहिता लागू करने समेत चुनाव संचालन के विभिन्न पहलुओं का उल्लेख किया।
उन्होंने दावा किया कि चुनाव में मुकाबला बहुत करीबी होने पर भी भाजपा को संस्थागत स्तर पर लाभ मिलता है। इन आरोपों पर चुनाव आयोग की ओर से आधिकारिक तौर पर क्या जवाब दिया गया है, यह अलग से महत्वपूर्ण है।
बिहार के बांकीपुर उपचुनाव का भी दिया उदाहरण
प्रशांत किशोर ने अपने हालिया राजनीतिक अनुभव का भी हवाला दिया। उन्होंने बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव का उल्लेख करते हुए प्रशासनिक मशीनरी के कथित दुरुपयोग और चुनाव प्रचार में धन के इस्तेमाल की अनदेखी का आरोप लगाया।
किशोर का दावा है कि इन वजहों से उन्हें अपेक्षित अंतर से जीत नहीं मिली। ये भी उनके द्वारा लगाए गए आरोप हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में पेश नहीं किया जा सकता।
जन सुराज नेता ने चुनावी प्रक्रिया में मतदाता सूचियों से जुड़े मुद्दे का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में मतदाता सूची तैयार करने से लेकर मतदान और प्रशासनिक व्यवस्था तक कई स्तरों पर सवाल उठते हैं।
यह बयान ऐसे समय आया है जब विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर सार्वजनिक बहस चल रही है।
ECI में आंतरिक असहमति की रिपोर्ट भी चर्चा में
हाल के दिनों में चुनाव आयोग के भीतर कुछ फैसलों को लेकर निर्वाचन आयुक्तों के बीच असहमति की रिपोर्टें भी सामने आई हैं। इंडिया टुडे की 24 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच दो निर्वाचन आयुक्तों ने आयोग के कुछ फैसलों पर 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं। हालांकि, आयोग ने कहा कि ये टिप्पणियां सामान्य निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा थीं और पिछले 10 महीनों में लिए गए फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
इस पृष्ठभूमि में प्रशांत किशोर के बयान को चुनावी प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग की भूमिका पर चल रही व्यापक बहस के संदर्भ में देखा जा रहा है।
2021 में पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सार्वजनिक रूप से तीखी टिप्पणी की थी। उस समय उन्होंने आयोग पर भाजपा के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया था और चुनाव कार्यक्रम तथा आचार संहिता से जुड़े फैसलों पर सवाल उठाए थे।
अब 2026 में उन्होंने कहा है कि चुनाव आयोग को लेकर उनके पुराने सवाल आज भी प्रासंगिक हैं। उनके मुताबिक, चुनाव की निष्पक्षता केवल किसी एक अधिकारी के कार्यकाल से जुड़ा विषय नहीं है बल्कि पूरी चुनावी व्यवस्था से संबंधित है।
आरोपों के बीच चुनावी प्रक्रिया पर बहस तेज
प्रशांत किशोर के बयान ऐसे समय आए हैं जब मतदाता सूची के पुनरीक्षण, निर्वाचन आयोग की निर्णय प्रक्रिया और चुनावी पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बहस जारी है। भाजपा और विपक्षी दल इस मुद्दे पर अलग-अलग दावे कर रहे हैं।
ऐसे में किशोर के आरोपों और निर्वाचन आयोग के आधिकारिक पक्ष को अलग-अलग देखना जरूरी है। चुनावी प्रक्रिया से जुड़े किसी भी दावे का अंतिम आकलन आधिकारिक रिकॉर्ड, उपलब्ध चुनावी आंकड़ों और संबंधित संस्थाओं के जवाब के आधार पर ही किया जा सकता है।