देहरादून, 21 सितंबर 2026 । उत्तराखंड की बीजेपी सरकार में समाज कल्याण मंत्री खजानदास को लेकर पार्टी के भीतर ही विवाद सामने आया है। चकराता क्षेत्र में अनुसूचित जाति और जनजाति से जुड़ी योजनाओं के आवंटन को लेकर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने मंत्री के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उनकी ओर से दिए गए प्रस्तावों की अनदेखी की गई और कथित तौर पर कांग्रेस से जुड़े लोगों को योजनाओं का लाभ दिया गया।
विवाद उस समय और बढ़ गया, जब आरोपों से नाराज मंत्री खजानदास ने कहा कि यदि उन पर लगाए गए भ्रष्टाचार या कमीशनखोरी के आरोप साबित होते हैं तो वह मंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने आत्महत्या तक करने की बात कही। यह बयान उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के संदर्भ में था, न कि किसी स्वतंत्र जांच के निष्कर्ष के तौर पर।
मामला समाज कल्याण विभाग की योजनाओं से जुड़ा है। बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने चकराता क्षेत्र में भारी गड़बड़ी होने और पार्टी कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप लगाया है। रविवार को इस मामले में पार्टी कार्यकर्ताओं ने अपनी ही सरकार के कैबिनेट मंत्री के घर के बाहर जोरदार प्रदर्शन भी किया है।
कौन हैं मंत्री खजानदास?
खजानदास उत्तराखंड की राजनीति में बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। वह राजपुर विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक हैं और मार्च 2026 में पुष्कर सिंह धामी सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। उनके पास समाज कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण, छात्र कल्याण और भाषा से जुड़े विभागों की जिम्मेदारी है।
खजानदास को बीजेपी के प्रमुख दलित चेहरों में भी गिना जाता है। मंत्री बनने के बाद समाज कल्याण विभाग से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन और बजट आवंटन की जिम्मेदारी उनके विभाग के अधीन है।
विवाद की शुरुआत चकराता विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित जाति उप योजना यानी SCSP और जनजाति उप योजना यानी TSP से जुड़ी योजनाओं की सूची को लेकर हुई। रिपोर्टों के अनुसार 11 सितंबर को योजनाओं की सूची जारी होने के बाद स्थानीय बीजेपी कार्यकर्ताओं ने इसमें अपनी अनदेखी का आरोप लगाया।
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा दिए गए प्रस्तावों को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिली। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि क्षेत्र में कांग्रेस से जुड़े लोगों को बड़ी संख्या में योजनाओं का लाभ दिया गया।
हालांकि, ये आरोप प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए हैं। इनके सही या गलत होने का निर्धारण किसी स्वतंत्र जांच या आधिकारिक निष्कर्ष से अभी नहीं हुआ है।
मंत्री के घर के बाहर हुआ प्रदर्शन
रविवार को बीजेपी कार्यकर्ताओं ने देहरादून की यमुना कॉलोनी स्थित मंत्री खजानदास के आवास के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का नेतृत्व पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चौहान ने किया। उनके साथ बीजेपी के कई स्थानीय नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
मधु चौहान बीजेपी विधायक मुन्ना सिंह चौहान की पत्नी हैं। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि चकराता क्षेत्र में जारी योजनाओं की सूची की समीक्षा की जाए और पार्टी कार्यकर्ताओं की शिकायतों पर कार्रवाई हो।
मंत्री खजानदास ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि समाज कल्याण विभाग को पूरे राज्य से प्रस्ताव प्राप्त होते हैं और उन्हीं प्रस्तावों के आधार पर योजनाओं को मंजूरी दी जाती है। उनका कहना है कि बजट का आवंटन किसी राजनीतिक दल के समर्थकों को ध्यान में रखकर नहीं किया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि वह पूरे प्रदेश के मंत्री हैं और सभी क्षेत्रों के बीच संतुलन बनाना उनकी जिम्मेदारी है। रिपोर्ट के अनुसार, मंत्री ने कहा कि चकराता को योजनाओं के तहत पर्याप्त बजट मिला है।
इसी दौरान उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए भ्रष्टाचार और कमीशन से जुड़े आरोपों को लेकर कहा कि यदि आरोप साबित होते हैं तो वह मंत्री पद छोड़ देंगे और आत्महत्या कर लेंगे।
कार्यकर्ताओं और मंत्री के बीच बातचीत नहीं बनी
मंत्री खजानदास और प्रदर्शन कर रहे बीजेपी नेताओं के बीच बातचीत भी हुई, लेकिन दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर पूरे मामले को उनके सामने रखने का फैसला किया।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष से भी इस मामले को लेकर बातचीत किए जाने की बात सामने आई है। कार्यकर्ता चाहते हैं कि योजनाओं की सूची की दोबारा समीक्षा हो और उनके प्रस्तावों पर भी विचार किया जाए।
चकराता को लेकर बीजेपी के सामने चुनौती
चकराता विधानसभा क्षेत्र लंबे समय से कांग्रेस के प्रभाव वाला क्षेत्र रहा है। ऐसे में क्षेत्र में बीजेपी के अपने कार्यकर्ताओं और सरकार के मंत्री के बीच सामने आया विवाद पार्टी के लिए संगठनात्मक स्तर पर महत्वपूर्ण है। हालांकि, इस विवाद का आगामी चुनावी प्रभाव क्या होगा, इस पर अभी कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
फिलहाल मुख्य विवाद योजनाओं के चयन, बजट आवंटन और पार्टी कार्यकर्ताओं की कथित अनदेखी को लेकर है। अब निगाहें मुख्यमंत्री स्तर पर होने वाली बातचीत और सरकार की ओर से मामले की समीक्षा पर हैं।