UN में नेतन्याहू के भाषण के दौरान बड़े पैमाने पर वॉकआउट, 75 देशों के बहिष्कार का दावा

न्यूयॉर्क, 25  सितंबर 2026 । इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण के दौरान बड़ी संख्या में देशों के प्रतिनिधि हॉल से बाहर चले गए। 24 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में नेतन्याहू ने संबोधन दिया। उनके बोलना शुरू करते ही कई प्रतिनिधिमंडलों ने वॉकआउट किया। फिलिस्तीनी मिशन के नेतृत्व में यह विरोध हुआ।

75 देशों के बायकॉट की चर्चा

सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि 75 से ज्यादा देशों ने नेतन्याहू के भाषण का बहिष्कार किया। हालांकि, इस संख्या को लेकर सावधानी जरूरी है। लाइवमिंट ने रिपोर्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र की ओर से वॉकआउट करने वाले देशों की कोई आधिकारिक सूची जारी नहीं की गई थी और 75 से अधिक झंडों वाली एक सूची स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हो सकी।

इजरायली अधिकारियों की अपनी गणना में 77 प्रतिनिधिमंडल ऐसे बताए गए जो या तो हॉल में मौजूद नहीं थे या नेतन्याहू के भाषण की शुरुआत में बाहर चले गए। इस आंकड़े में वे देश भी शामिल हैं जिनके प्रतिनिधि उस सत्र में मौजूद ही नहीं थे, इसलिए इसे सीधे तौर पर 77 देशों का ‘बायकॉट’ कहना सही नहीं होगा।

रिपोर्टों में सऊदी अरब, ईरान, तुर्की, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, मलेशिया, मालदीव, म्यांमार, उत्तर कोरिया, तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान समेत कई देशों के प्रतिनिधियों के वॉकआउट का उल्लेख है। हालांकि, सभी देशों के लिए एक समान कारण या आधिकारिक बयान उपलब्ध नहीं है।

इजरायली रिपोर्ट के मुताबिक मिस्र, जॉर्डन, लेबनान और सीरिया समेत कुछ देशों के प्रतिनिधि हॉल में मौजूद नहीं थे, लेकिन हर अनुपस्थिति को विरोध प्रदर्शन के रूप में नहीं माना गया।

नेतन्याहू ने क्या कहा?

वॉकआउट के बीच नेतन्याहू ने अपना भाषण जारी रखा। उन्होंने ईरान, हमास और इजरायल की आलोचना करने वाले देशों पर निशाना साधा। उन्होंने गाजा युद्ध, 7 अक्टूबर 2023 के हमले और इजरायल की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अपनी सरकार का पक्ष रखा।

नेतन्याहू ने हॉल से बाहर जा रहे प्रतिनिधियों पर भी टिप्पणी की और बचे हुए प्रतिनिधियों से भी बाहर जाने को कहा। उनके भाषण के दौरान इजरायली प्रतिनिधिमंडल की ओर से समर्थन में तालियां भी बजाई गईं।

वॉकआउट से जुड़ी प्रकाशित सूचियों में अलग-अलग अंतर हैं और संयुक्त राष्ट्र की कोई आधिकारिक देशवार सूची उपलब्ध नहीं होने के कारण हर देश की स्थिति को एक ही सूची के आधार पर तय करना उचित नहीं है। इसलिए 75 देशों के आंकड़े को फिलहाल रिपोर्ट किया गया दावा मानना ज्यादा सटीक है, न कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा पुष्टि किया गया आंकड़ा।

UN में क्यों हुआ विरोध?

नेतन्याहू के भाषण से पहले भी संयुक्त राष्ट्र महासभा में गाजा युद्ध और फिलिस्तीनी मुद्दे को लेकर इजरायल की नीतियों पर विभिन्न देशों ने आलोचना की थी। नेतन्याहू के भाषण के दौरान हुआ वॉकआउट इसी व्यापक राजनयिक और राजनीतिक विरोध की पृष्ठभूमि में सामने आया।

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