Cutie नहीं-क्रांति हूं’, दिल्ली की सड़कों पर क्यों गूंजे ये नारे?
आस्था कुंज घटना के बाद छात्राओं का सुरक्षा मार्च
नई दिल्ली, 29 सितंबर 2026 । दिल्ली यूनिवर्सिटी के नॉर्थ कैंपस में सोमवार को छात्राओं का एक बड़ा मार्च निकला। तेज बारिश के बावजूद अलग-अलग कॉलेजों की छात्राएं इसमें शामिल हुईं। मार्च के दौरान ‘रानी बेटी Rebel बनेगी’, ‘Cutie नहीं, क्रांति हूं’, ‘शर्म नहीं, सवाल करूंगी’ और ‘रेपिस्ट को अंदर करो, लड़कियों को नहीं’ जैसे नारे सुनाई दिए। यह मार्च महिलाओं की सुरक्षा, सुरक्षित सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की स्वतंत्र आवाजाही से जुड़े मुद्दों को लेकर आयोजित किया गया था।
LSR स्टूडेंट्स के मार्च, गार्गी और कमला नेहरू कॉलेज की स्टूडेंट्स के विरोध प्रदर्शनों के बाद यह नॉर्थ कैंपस का बड़ा मार्च रहा, जिसमें सुरक्षा की मांग की गई। मिरांडा हाउस, आईपी, लक्ष्मीबाई, मैत्रेयी, श्रद्धानंद, माता सुंदरी समेत कई कॉलेजों की लड़कियों समेत LGBTQA कम्युनिटी भी हिस्सा बनी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मार्च की शुरुआत मिरांडा हाउस के गेट नंबर-4 से हुई और छात्राएं आर्ट फैकल्टी की ओर बढ़ीं। इसके बाद मार्च छात्रा मार्ग होते हुए विवेकानंद की प्रतिमा के पास पहुंचा। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी भी तैनात रहे।
मार्च में मिरांडा हाउस के अलावा IP कॉलेज, लक्ष्मीबाई कॉलेज, मैत्रेयी कॉलेज, श्रद्धानंद कॉलेज, माता सुंदरी कॉलेज, गार्गी कॉलेज और अन्य संस्थानों की छात्राओं ने हिस्सा लिया। LGBTQA समुदाय के सदस्य भी मार्च में शामिल हुए।
पोस्टरों पर लिखे नारों ने खींचा ध्यान
मार्च के दौरान छात्राओं के हाथों में कई पोस्टर और बैनर दिखाई दिए। इनमें ‘हम आजाद हैं सिर्फ पन्नों पर’, ‘Cutie नहीं, क्रांति हूं’, ‘बेटी की लोकेशन नहीं, बेटे का इंटेंट चेक करो’ और महिलाओं की आजादी से जुड़े अन्य संदेश लिखे थे।
एक अन्य प्रमुख नारा था- ‘राजा बेटा सुधार लो, रानी बेटी राज कर लेगी’। छात्राओं ने इन नारों के जरिए महिलाओं की सुरक्षा के साथ-साथ समाज में महिलाओं को लेकर मौजूद धारणाओं पर भी सवाल उठाए।
‘रेपिस्ट को अंदर करो, लड़कियों को नहीं’
प्रदर्शन के दौरान छात्राओं ने ‘रेपिस्ट को अंदर करो, लड़कियों को नहीं’ और ‘हमें लेकर रहेंगे आजादी’ जैसे नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि महिलाओं की सुरक्षा के नाम पर उनकी आवाजाही या स्वतंत्रता पर पाबंदी लगाने के बजाय सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित बनाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
छात्राओं ने बेहतर स्ट्रीट लाइटिंग, सुरक्षित सड़कें और सार्वजनिक परिवहन की बेहतर पहुंच जैसे मुद्दे भी उठाए।
आस्था कुंज घटना के बाद तीसरा स्वतंत्र मार्च
यह मार्च दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय किशोरी के साथ कथित गैंगरेप की घटना के बाद महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों की कड़ी में हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले लेडी श्रीराम कॉलेज, गार्गी कॉलेज और कमला नेहरू कॉलेज के आसपास भी छात्राओं ने मार्च निकाले थे।
इन प्रदर्शनों में महिलाओं की सुरक्षा के साथ-साथ रात में महिलाओं की आवाजाही पर रोक लगाने जैसे उपायों का विरोध किया गया। छात्राओं ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और सार्वजनिक स्थानों पर निगरानी बढ़ाने की मांग रखी।
‘लड़कियों को नहीं, लड़कों को सिखाएं’
मार्च में शामिल छात्राओं ने महिला सुरक्षा को केवल महिलाओं के व्यवहार, कपड़ों या बाहर निकलने के समय से जोड़ने पर सवाल उठाया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सुरक्षा के लिए कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ लड़कों को कम उम्र से सम्मान और सहमति के बारे में शिक्षित करने की जरूरत है।
कुछ छात्राओं ने यह भी कहा कि परिवारों की चिंता और सामाजिक दबाव के कारण कई लड़कियां ऐसे प्रदर्शनों में शामिल होने से डरती हैं। उनके मुताबिक, महिलाओं को सुरक्षित माहौल देने के साथ उनकी स्वतंत्र आवाजाही सुनिश्चित करना भी जरूरी है। ये प्रदर्शनकारियों के विचार हैं।
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, नॉर्थ कैंपस का यह मार्च किसी छात्र संगठन के बैनर तले आयोजित नहीं किया गया था। छात्राओं ने इसे महिलाओं की सुरक्षा और स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों को उठाने वाला स्वतंत्र मार्च बताया।
तेज बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में छात्राओं के जुटने से नॉर्थ कैंपस में इस प्रदर्शन का असर दिखाई दिया। पुलिस की मौजूदगी के बीच मार्च शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ा और आर्ट फैकल्टी के आसपास इसका समापन हुआ।
महिला सुरक्षा को लेकर दिल्ली में बढ़ी बहस
आस्था कुंज मामले के बाद दिल्ली में महिला सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। DU के अलग-अलग कॉलेजों की छात्राओं के प्रदर्शनों ने सुरक्षित सड़कों, स्ट्रीट लाइट, सार्वजनिक परिवहन और पुलिस सुरक्षा जैसे मुद्दों को फिर चर्चा में ला दिया है।
नॉर्थ कैंपस में गूंजे ‘रानी बेटी Rebel बनेगी’ और ‘Cutie नहीं, क्रांति हूं’ जैसे नारे इसी व्यापक बहस का हिस्सा रहे। आने वाले दिनों में इन प्रदर्शनों के बाद प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।