उत्तर कोरिया ने किया हाइपरसोनिक मिसाइल का टेस्ट?
किम जोंग उन ने खुद देखी लॉन्चिंग, बढ़ी दुनिया की चिंता
नॉर्थ कोरिया , 22 सितंबर 2026 । उत्तर कोरिया ने एक बार फिर अपनी मिसाइल क्षमता का प्रदर्शन किया है। देश की सरकारी मीडिया ने मंगलवार को बताया कि नेता किम जोंग उन की मौजूदगी में 20 सितंबर को एक नए हथियार सिस्टम का सफल परीक्षण किया गया। उत्तर कोरिया ने इसे आधुनिक रक्षा तकनीक में महत्वपूर्ण प्रगति बताया है। हालांकि, सरकारी बयान में हथियार की स्पष्ट पहचान नहीं की गई है, लेकिन जारी तस्वीरों में दिखाई दे रही जानकारी के आधार पर इसे हाइपरसोनिक क्षमता वाली मिसाइल से जोड़ा जा रहा है।
Hwasong-11Ma-1 का नाम आया सामने
उत्तर कोरिया की ओर से जारी तस्वीरों में किम जोंग उन एक मॉनिटर को देखते नजर आए। स्क्रीन पर Hwasongpho-11Ma-1 की उड़ान संबंधी जानकारी दिखाई दे रही थी। दक्षिण कोरियाई और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने इन तस्वीरों के आधार पर अनुमान लगाया है कि यह पहले से विकसित मिसाइल का हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल वाला उन्नत संस्करण हो सकता है।
हालांकि, उत्तर कोरिया ने अभी तक आधिकारिक तौर पर यह नहीं कहा है कि परीक्षण की गई मिसाइल हाइपरसोनिक थी। इसलिए इसे फिलहाल हाइपरसोनिक मिसाइल परीक्षण के तौर पर रिपोर्ट करते समय इस दावे को उत्तर कोरिया के हथियार कार्यक्रम से जुड़े आकलन के रूप में देखना जरूरी है।
दक्षिण कोरिया ने दो मिसाइल लॉन्च का पता लगाया
दक्षिण कोरिया की सेना के अनुसार 20 सितंबर को उत्तर कोरिया ने पूर्वी तट के वॉनसान क्षेत्र से दो कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। पहली मिसाइल ने लगभग 450 किलोमीटर और दूसरी ने 600 किलोमीटर से अधिक दूरी तय की। दोनों मिसाइलें समुद्र में गिरीं और जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र के बाहर बताई गईं।
उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया में जारी तस्वीरों में हालांकि एक उड़ान दूरी 908.2 किलोमीटर दिखाई गई। दक्षिण कोरियाई विशेषज्ञों ने इस आंकड़े को लेकर भी सवाल उठाए हैं और संभावना जताई है कि उत्तर कोरिया ने परीक्षण की सफलता प्रदर्शित करने के लिए आंकड़े को अलग तरीके से पेश किया हो सकता है।
हाइपरसोनिक हथियार क्यों अहम हैं?
हाइपरसोनिक हथियार आम तौर पर ध्वनि की गति से पांच गुना से अधिक रफ्तार से उड़ने में सक्षम माने जाते हैं। इनकी खासियत केवल गति नहीं, बल्कि उड़ान के दौरान दिशा बदलने की क्षमता भी है। यही वजह है कि ऐसे हथियार पारंपरिक मिसाइल रक्षा प्रणालियों के लिए अतिरिक्त चुनौती पैदा कर सकते हैं।
उत्तर कोरिया पिछले कुछ वर्षों से हाइपरसोनिक हथियार विकसित करने का दावा करता रहा है। जनवरी 2026 में भी किम जोंग उन की निगरानी में हाइपरसोनिक मिसाइलों का परीक्षण किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। उस समय उत्तर कोरिया ने मिसाइलों के करीब 1,000 किलोमीटर दूर लक्ष्य तक पहुंचने का दावा किया था।
किम जोंग उन ने बताई बड़ी सैन्य उपलब्धि
उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी KCNA के मुताबिक किम जोंग उन ने नए हथियार के परीक्षण को सैन्य आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण प्रगति बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की तकनीकी क्षमता देश की युद्ध तैयारी को मजबूत करेगी।
KCNA ने किम के हवाले से कहा कि इस प्रगति से विरोधियों के लिए बड़ी चुनौती पैदा होगी। हालांकि, इन बयानों को उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
अमेरिका-दक्षिण कोरिया के साथ तनाव के बीच परीक्षण
यह परीक्षण ऐसे समय हुआ है जब कोरियाई प्रायद्वीप पर सैन्य गतिविधियों को लेकर तनाव बना हुआ है। उत्तर कोरिया ने हाल में अमेरिका और उसके सहयोगियों के सैन्य अभ्यासों की आलोचना की है।
दूसरी ओर दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान उत्तर कोरिया के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम को लेकर लगातार सुरक्षा समन्वय करते रहे हैं। दक्षिण कोरिया ने हालिया मिसाइल लॉन्च को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन बताया है।
विशेषज्ञों की नजर मिसाइल की वास्तविक क्षमता पर
उत्तर कोरिया लंबे समय से हाइपरसोनिक हथियार विकसित करने का दावा कर रहा है, लेकिन बाहरी विशेषज्ञों ने उसके परीक्षणों में बताई गई गति और मैन्युवरेबिलिटी को लेकर समय-समय पर सवाल उठाए हैं। इसलिए नए परीक्षण के बाद भी यह महत्वपूर्ण रहेगा कि मिसाइल ने वास्तविक परिस्थितियों में कितनी गति और दिशा बदलने की क्षमता हासिल की है।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि उत्तर कोरिया मिसाइल तकनीक को लगातार आगे बढ़ाने पर जोर दे रहा है और सितंबर का यह परीक्षण उसके हथियार कार्यक्रम का एक और प्रदर्शन है।