फरीदाबाद , 25 सितंबर 2026 । फरीदाबाद के बल्लभगढ़ इलाके में निवेश के नाम पर रिटायर्ड बैंक कर्मचारी से 3,21,999 रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। साइबर थाना बल्लभगढ़ पुलिस ने मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में एक बीटेक पास सॉफ्टवेयर इंजीनियर भी शामिल है। पुलिस के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर बैंक खातों की व्यवस्था कर उन्हें साइबर ठगों तक पहुंचाने का काम करते थे।
फेसबुक विज्ञापन के जरिए शुरू हुआ संपर्क
पुलिस के अनुसार, सेक्टर-7डी निवासी रिटायर्ड बैंक कर्मचारी ने 16 अप्रैल 2026 को फेसबुक पर निवेश से संबंधित एक विज्ञापन देखा था। विज्ञापन में 21,999 रुपये निवेश करने का प्रचार किया गया था।
विज्ञापन पर क्लिक करने के बाद शिकायतकर्ता को व्हाट्सऐप के जरिए संपर्क किया गया। उसे शेयर ट्रेडिंग में निवेश करने की सलाह दी गई। इसके बाद पीड़ित ने निवेश के लिए हामी भर दी और अलग-अलग लेनदेन के जरिए 16 अप्रैल से 29 अप्रैल के बीच कुल 3,21,999 रुपये लगा दिए।
रकम लगाने के बाद नहीं मिला पैसा वापस
शिकायतकर्ता के मुताबिक, निवेश के बाद उसे कोई रकम वापस नहीं मिली। इसके बाद उसने साइबर थाना बल्लभगढ़ में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और पैसे के लेनदेन से जुड़े बैंक खातों तथा अन्य डिजिटल कड़ियों की जांच की।
जांच के दौरान पुलिस को कथित तौर पर उन लोगों की जानकारी मिली, जिन्होंने बैंक खातों को साइबर ठगी के नेटवर्क तक पहुंचाने में भूमिका निभाई थी।
पुलिस ने इस मामले में अंकुर श्रीवास्तव, विवेक राय और प्रकाश सरकार को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक तीनों को 21 सितंबर को उत्तराखंड से पकड़ा गया।
अंकुर श्रीवास्तव लखनऊ का रहने वाला बताया गया है, जबकि विवेक राय और प्रकाश सरकार का संबंध उत्तराखंड से बताया गया है। तीनों को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
सॉफ्टवेयर इंजीनियर भी आरोपी
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में अंकुर श्रीवास्तव बीटेक पास है और सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम करता है। वहीं विवेक राय 12वीं और प्रकाश सरकार 8वीं पास बताया गया है।
जांच में पुलिस को कथित तौर पर पता चला कि तीनों आरोपी सीधे निवेश संबंधी ठगी करने के बजाय बैंक खातों की व्यवस्था करने और उन्हें आगे पहुंचाने की भूमिका में थे।
पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, प्रकाश सरकार ने विपुल राय से कपिल नामक व्यक्ति का बैंक खाता हासिल किया था। इसके बाद यह खाता विवेक और अंकुर तक पहुंचा। पुलिस का कहना है कि दोनों ने कथित तौर पर टेलीग्राम के जरिए बैंक खाते को आगे साइबर ठगों तक पहुंचाया।
इससे पुलिस को आशंका है कि ठगी के पीछे केवल तीन आरोपी नहीं, बल्कि एक बड़ा नेटवर्क भी हो सकता है। मामले में पैसों के लेनदेन और अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच जारी है।
दो अन्य आरोपी पहले ही गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार, मामले में कपिल और विपुल राय नाम के दो अन्य आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। अब तीन और गिरफ्तारियां होने के बाद पुलिस कथित साइबर ठगी नेटवर्क की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी है।
जांच में यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इन बैंक खातों का इस्तेमाल कितने मामलों में हुआ और ठगी की रकम किन-किन खातों में ट्रांसफर की गई।
निवेश से पहले ऐसे विज्ञापनों से रहें सावधान
यह मामला एक बार फिर सोशल मीडिया पर दिखने वाले निवेश संबंधी विज्ञापनों को लेकर सावधानी की जरूरत बताता है। किसी भी शेयर ट्रेडिंग या निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले कंपनी, प्लेटफॉर्म और उसके आधिकारिक पंजीकरण की जानकारी जांचना जरूरी है।
खास तौर पर फेसबुक या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दिखने वाले ऐसे विज्ञापनों के बाद अचानक व्हाट्सऐप पर संपर्क करने वाले लोगों के दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि किए बिना पैसे ट्रांसफर नहीं करने चाहिए।
फिलहाल फरीदाबाद साइबर थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है और गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े बैंक खातों तथा डिजिटल लेनदेन की जानकारी खंगाली जा रही है।