तेहरान, 24 सितंबर 2026 । ईरान ने अमेरिका और इजरायल को दोबारा सैन्य हमला होने की स्थिति में संघर्ष के विस्तार को लेकर चेतावनी दी है। ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के सैन्य सलाहकार मेजर जनरल याह्या रहीम सफवी ने कहा है कि अगर ईरान पर फिर हमला होता है तो युद्ध का मोर्चा हिंद महासागर और उससे आगे तक फैल सकता है। यह बयान 24 सितंबर 2026 को सामने आया है।
न्यूज एजेंसी AFP के मुताबिक, ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई के सलाहकार याह्या रहीम सफावी ने कहा कि जंग पहले ही फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट से आगे बढ़कर लाल सागर तक पहुंच चुकी है। दोबारा हमला हुआ तो इसका दायरा और बढ़ सकता है।
एक्स्पर्ट्स के मुताबिक इसका असर भारत और चीन जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर पड़ सकता है। हिंद महासागर पश्चिम एशिया को एशिया से जोड़ने वाला अहम समुद्री रास्ता है। यहां तनाव बढ़ने पर तेल लेकर आने वाले जहाजों पर हमले का खतरा बढ़ सकता है।
फारस की खाड़ी से हिंद महासागर तक का जिक्र
सफवी ने ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फर्स के जरिए जारी एक वीडियो में कहा कि मौजूदा संघर्ष फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य से आगे लाल सागर तक पहुंच चुका है। उनके मुताबिक, अगर फिर से युद्ध होता है तो संघर्ष का मोर्चा और आगे बढ़कर हिंद महासागर तक पहुंच सकता है।
उन्होंने कहा कि ईरानी सशस्त्र बलों ने अमेरिका या इजरायल की ओर से संभावित नए हमले की स्थिति के लिए अलग-अलग परिस्थितियों के अनुरूप योजनाएं तैयार की हैं।
ईरानी सैन्य सलाहकार ने लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य का भी उल्लेख किया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका नया युद्ध शुरू करता है तो लाल सागर और बाब अल-मंदेब के आसपास एक नया मोर्चा खुल सकता है।
बाब अल-मंदेब लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे हिंद महासागर से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इस वजह से इस क्षेत्र में किसी बड़े सैन्य तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवहन पर भी पड़ सकता है।
पहली बार हिंद महासागर का सीधा उल्लेख
रिपोर्टों के मुताबिक, 24 सितंबर के बयान में ईरानी सर्वोच्च नेता के सलाहकार ने पहली बार इस संदर्भ में हिंद महासागर का सीधे उल्लेख किया है। हिंद महासागर में ब्रिटेन और अमेरिका का रणनीतिक सैन्य अड्डा डिएगो गार्सिया भी स्थित है।
हालांकि, सफवी का बयान एक चेतावनी है और इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि हिंद महासागर में निश्चित रूप से नया सैन्य मोर्चा खुलने जा रहा है।
ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी तनाव जारी है। हाल की रिपोर्टों में इस क्षेत्र में तेल टैंकरों और अन्य जहाजों से जुड़े हमलों का उल्लेख किया गया है। होर्मुज दुनिया के प्रमुख ऊर्जा समुद्री मार्गों में से एक है, इसलिए यहां किसी भी सैन्य तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है।
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच सामने आया बयान
ईरानी सैन्य सलाहकार का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष को लेकर तनाव बना हुआ है। हाल के दिनों में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने भी कहा था कि आगे उकसावे की स्थिति में उसकी सैन्य रणनीति और लक्ष्यों में बदलाव हो सकता है।
इस बीच न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान दोनों पक्षों के बीच बातचीत की कोशिशों की भी खबरें सामने आई हैं। ऐसे में सैन्य चेतावनियों के साथ कूटनीतिक प्रयास भी समानांतर रूप से चल रहे हैं।
फिलहाल ईरान की ओर से हिंद महासागर तक संघर्ष फैलने की चेतावनी सामने आई है, लेकिन वास्तविक सैन्य कार्रवाई या नए मोर्चे के खुलने को लेकर कोई निश्चित घोषणा नहीं हुई है। आने वाले दिनों में अमेरिका, इजरायल और ईरान की सैन्य तथा कूटनीतिक गतिविधियों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर रहेगी।