अखिलेश पर मनोज मुंतशिर के बयान से सियासी घमासान

सपा ने पूछा- यश भारती कब लौटाओगे?

लखनऊ , 21  सितंबर 2026 । लखनऊ में गीतकार मनोज मुंतशिर के समाजवादी पार्टी और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को लेकर दिए गए बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। मनोज मुंतशिर ने एक बातचीत में अखिलेश यादव को लेकर तीखी टिप्पणी की और अयोध्या से जुड़े पुराने विवादों का भी जिक्र किया। इसके बाद समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अमीक जामेई ने मनोज मुंतशिर पर पलटवार करते हुए उनके यश भारती सम्मान और उससे जुड़ी आर्थिक सुविधाओं का मुद्दा उठाया।

सपा नेता अमीक जामेई ने अपने X हैंडल पर लिखा है- 2016 मे मेरे नेता आदरणीय अखिलेश यादव जी ने यशभारती सम्मान से कवि मनोज मुंतशीर को 12 लाख एकमुश्त और 50 हजार/महीने पेंशन आजीवन का इंतजाम कर दिया था। सरजू लाल हो गई थी 2016 में। इस फर्जी पेड राष्ट्रवादी को याद नहीं था। कब लौटाओगे यशभारती?

मनोज मुंतशिर ने अखिलेश यादव पर क्या कहा?

मनोज मुंतशिर ने राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे की कथित चोरी के मुद्दे पर बातचीत के दौरान अखिलेश यादव और उनके पिता मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अयोध्या में मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में हुई घटनाओं को भुलाया नहीं जा सकता।

मनोज मुंतशिर ने अखिलेश यादव को लेकर उन्हें “सबसे झूठे रामभक्त” बताया। उन्होंने यह भी कहा कि वह इस तरह की राजनीति से जुड़े लोगों की बात नहीं सुनना चाहते। ये बयान उन्होंने एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू के दौरान दिए थे।

सपा ने यश भारती सम्मान का मुद्दा उठाया

मनोज मुंतशिर के बयान के बाद सपा प्रवक्ता अमीक जामेई ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने 2016 में अखिलेश यादव के हाथों मनोज मुंतशिर को यश भारती सम्मान दिए जाने का जिक्र किया।

जामेई के मुताबिक, उस समय सम्मान के साथ 12 लाख रुपये की एकमुश्त राशि और 50 हजार रुपये प्रतिमाह आजीवन पेंशन का प्रावधान था। उन्होंने सवाल किया कि यदि मनोज मुंतशिर तत्कालीन सरकार और अखिलेश यादव के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी कर रहे हैं तो वह सम्मान वापस कब करेंगे।

हालांकि, पुराने मीडिया रिकॉर्ड में यश भारती पुरस्कार की राशि को लेकर अलग आंकड़े भी प्रकाशित हुए हैं। 2017 की एक रिपोर्ट में पुरस्कार राशि 11 लाख रुपये और 50 हजार रुपये मासिक पेंशन बताई गई थी। इसलिए वर्तमान विवाद में 12 लाख रुपये वाली राशि को सपा नेता के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

सपा मीडिया सेल ने भी साधा निशाना

सपा मीडिया सेल ने भी मनोज मुंतशिर के बयान पर सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए प्रतिक्रिया दी। पोस्ट में आरोप लगाया गया कि मनोज मुंतशिर ने उस समय अखिलेश यादव की आलोचना नहीं की, जब उन्हें यश भारती सम्मान मिला था।

सपा की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि मनोज मुंतशिर अब राजनीतिक रूप से अलग रुख अपना रहे हैं। ये सपा की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं, जिन पर मनोज मुंतशिर की प्रतिक्रिया अलग से देखी जानी बाकी है।

अयोध्या और मुलायम सिंह यादव का मुद्दा भी उठा

मनोज मुंतशिर ने अपने बयान में मुलायम सिंह यादव के अयोध्या से जुड़े फैसलों और घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी चाहे जितनी कोशिश कर ले, मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में अयोध्या में जो हुआ उसे भुलाया नहीं जा सकता।

उन्होंने यह भी कहा कि राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के लिए जो भी जिम्मेदार हो, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। मनोज मुंतशिर ने कहा कि उन्हें समाजवादी पार्टी के निशाने पर आने का डर नहीं है।

यश भारती को लेकर पुराना विवाद क्या है?

यश भारती सम्मान उत्तर प्रदेश सरकार का एक प्रमुख राज्य सम्मान रहा है। अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को यह सम्मान दिया गया था। 2017 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, उस समय पुरस्कार के साथ 11 लाख रुपये और 50 हजार रुपये मासिक पेंशन का प्रावधान बताया गया था। पुरस्कारों की पात्रता और चयन को लेकर उस समय भी राजनीतिक विवाद सामने आए थे।

वर्तमान विवाद में सपा ने इसी पुराने सम्मान को मनोज मुंतशिर के बयान के जवाब में राजनीतिक मुद्दा बनाया है। दूसरी ओर, मनोज मुंतशिर का मौजूदा बयान अयोध्या और अखिलेश यादव की राजनीति को लेकर उनके वर्तमान रुख से जुड़ा है।

बयानबाजी से बढ़ा राजनीतिक विवाद

मनोज मुंतशिर के बयान और सपा के पलटवार ने एक बार फिर अयोध्या, मुलायम सिंह यादव की विरासत, अखिलेश यादव की राजनीति और यश भारती सम्मान जैसे पुराने मुद्दों को चर्चा में ला दिया है। फिलहाल दोनों पक्षों की ओर से बयान सामने आए हैं और विवाद मुख्य रूप से राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के स्तर पर है।

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