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सुबह बंधवाई राखी, रक्षा का दिया वचन, शाम को दुनिया से अलविदा
भद्रकाली में बस हादसे में दो चचेरे भाइयों की मौत से मातम में बदलीं खुशियां


ऋषिकेश। रक्षाबंधन के दिन जिन वहनों की कलाई पर भाई ने राखी बंधवाई थी, उन्हें क्या पता था कि कुछ ही घंटों बाद वही भाई उनसे हमेशा के लिए दूर हो जाएंगे। सुबह वहन से राखी बंधवाकर जीवनभर उसकी रक्षा का वचन देने वाले दो चचेरे भाई शुभम और ऋषभ शाम को एक दर्दनाक सड़क हादसे में दुनिया छोड़ गए। भद्रकाली के समीप हुए बस हादसे ने दो परिवारों के चिराग बुझा दिए और रक्षाबंधन की खुशियों को मातम में बदल गई।
शुक्रवार देर शाम करीब साढ़े आठ बजे ऋषिकेश से हरिद्वार जा रही एक बस भद्रकाली मोड़ के समीप अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई। इसी दौरान सड़क किनारे अपनी स्कूटी खड़ी कर बैठे शुभम (26) पुत्र कुंदन सिंह विष्ट और ऋषभ (34) पुत्र विक्रम सिंह बिष्ट निवासी गली नंबर-6, गणेश विहार, गंगानगर ऋषिकेश बस की चपेट में आ गए। हादसा इतना भयावह था कि दोनों चचेरे भाइयों की मौके पर ही मौत हो गई।
रक्षाबंधन का दिन दोनों परिवारों के लिए सुबह तक खुशियों से भरा था। वहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी। भाईयोंने भी वहनों की रक्षा का वचन दिया।
ऋषिकेश। भद्रकाली पुलिस चौकी से ब्रह्मानंद मोड़ और चौकी से ढालवाला स्थित पुराना एआरटीओ कार्यालय के पास से सड़क किनारे लगे कुछ साइनबोर्ड गायब हैं। साइनबोर्ड के न होने से दूसरे राज्यों वाहन चालक इस रोड पर वाहनों से नियंत्रण खो देते हैं जिससे हादसे हो रहे हैं। परिवहन विभाग, पुलिस और बीआरओ इस सड़क की सुध लेने को तैयार नहीं हैं।
सड़क किनारे लगे रेडियम के पोल भी क्षतिग्रस्त होने के बाद वाहन चालक सड़क अंदाजा नहीं लगा पाते। भद्रकाली चौकी से करीब एक किलोमीटर दूर ब्रह्मानंद मोड़ की ओर भी अंधे मोड़ पर कई वाहन पलट चुके हैं। इसी रोड पर दो साल से क्रश बैरियर क्षतिग्रस्त हो रखा है। खारास्रोत से भद्रकाली पुलिस चौकी होते नरेंद्रनगर की ओर गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग बीआरओ के पास है लेकिन बीआरओ के अधिकारी भी सड़क सुरक्षा की ओर ध्यान देने को तैयार नहीं हैं।
भद्रकाली पुलिस चौकी से खारास्स्रोत तक करीब दो किलोमीटर रोड पर कई वाहन अनियंत्रित होकर पलट चुके हैं। कई लोग जान से हाथ धो चुके हैं। इस सड़क को दुर्घटना मुक्त करने के लिए परिवहन विभाग और अन्य विभाग की रिपोर्ट फाइलों में उलझी पड़ी है। दुर्घटना के बाद परिवहन विभाग की ओर से रिपोर्ट बनाने के बाद आरटीओ देहरादून के कार्यालय को भेजी जाती है वह रिपोर्ट वहां पर धूल फांकती रहती है।
