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हल्द्वानी: उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस की SIR समिति के अध्यक्ष और पूर्व विधायक मनोज रावत ने आरोप लगाया कि SIR की अलग-अलग प्रक्रियाओं के जरिए बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की जा रही है।
मनोज रावत ने कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के साथ कुमाऊं कमिश्नर के नाम ज्ञापन जिला अधिकारी नैनीताल को सौंपा। उन्होंने कहा कि नैनीताल और ऊधम सिंह नगर जिलों की कई विधानसभा सीटों में मतदाता सूची को लेकर बड़ी संख्या में आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं।


कांग्रेस नेता का आरोप है कि कुछ लोगों की ओर से हजारों मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आपत्तियां दी गई हैं। उनका कहना है कि इनमें कई शिकायतें अधूरी या गलत जानकारी पर आधारित हैं। कांग्रेस ने मांग की कि ऐसी आपत्तियों की नियमानुसार जांच कर कार्रवाई की जाए।
मनोज रावत ने दावा किया कि फॉर्म-7 के जरिए भी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने के आवेदन दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन प्रक्रियाओं के कारण आम मतदाताओं को नोटिस और सुनवाई की प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मतदाता सूची में डेमोग्राफिक सिमिलर एंट्री (DSE) और फोटोग्राफिक सिमिलर एंट्री (PSE) की जांच के नाम पर युवा और नए मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं। कांग्रेस ने चुनाव आयोग से पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बरतने की मांग की है।
मनोज रावत ने कहा कि कांग्रेस अपने स्तर पर मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए काम करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि गरीब, किसान, पिछड़े वर्ग, अनुसूचित जाति और जनजाति से जुड़े मतदाताओं के नाम भी इस प्रक्रिया से प्रभावित हो सकते हैं।
कांग्रेस नेता ने चुनाव आयोग से सवाल किया कि यदि पहले ही सॉफ्टवेयर के माध्यम से दोहरे मतदाताओं की पहचान की जा चुकी है…तो दोबारा इसी तरह की प्रक्रिया की जरूरत क्यों पड़ रही है। उन्होंने अधिकारियों से नियमों के अनुसार सभी आपत्तियों का निस्तारण करने की मांग की।
इस दौरान हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश, जिला अध्यक्ष राहुल छिमवाल, महानगर अध्यक्ष गोविंद सिंह बिष्ट सहित कांग्रेस के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। कांग्रेस ने कहा कि मतदाता सूची से किसी भी पात्र व्यक्ति का नाम गलत तरीके से हटाया नहीं जाना चाहिए।
