यूपी में ओला-उबर समेत एग्रीगेटर कंपनियों पर शिकंजा
लाइसेंस के बिना नहीं चला सकेंगी यात्री और डिलीवरी सेवाएं
गाजियाबाद, 23 सितंबर 2026 । उत्तर प्रदेश सरकार ने ऐप आधारित यात्री परिवहन और ऑनलाइन डिलीवरी सेवाओं को नियमन के दायरे में लाने के लिए लाइसेंस व्यवस्था लागू कर दी है। नई व्यवस्था के तहत ओला, उबर जैसे कैब एग्रीगेटर के साथ-साथ डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर और दायरे में आने वाली ई-कॉमर्स इकाइयों को राज्य परिवहन प्राधिकरण से लाइसेंस लेना होगा। यह प्रावधान उत्तर प्रदेश मोटरयान (समूहक एवं वितरण सेवा प्रदाता) नियमावली, 2026 के तहत लागू किया गया है।
अब आधिकारिक लाइसेंस लेना अनिवार्य
राज्य परिवहन विभाग की ओर से जारी नए नोटिस के अनुसार, अब प्रदेश में दोपहिया, तीन-पहिया, ऑटो और चार-पहिया (कैब/बस) यात्री वाहन वाले एग्रीगेटर्स चलाने (जैसे ओला, उबर, रैपिडो) के साथ-साथ ऑनलाइन डिलिवरी सर्विस देने वाली ई-कॉमर्स कंपनियों (जैसे स्विगी, जोमैटो, अमेज़न आदि) के लिए राज्य सरकार की ओर से जारी आधिकारिक लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया गया है।
नियमों के तहत ऐसे डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म इसके दायरे में आएंगे जो दोपहिया, तीन-पहिया, चार-पहिया यात्री वाहनों या बसों को अपने प्लेटफॉर्म पर जोड़कर परिवहन सेवा उपलब्ध कराते हैं। इसके अलावा वे डिलीवरी सेवा प्रदाता और ई-कॉमर्स इकाइयां भी शामिल हैं, जो डिलीवरी वाहनों को अपने प्लेटफॉर्म से जोड़कर उत्पाद, कूरियर, पैकेज या पार्सल पहुंचाने की सेवा संचालित करती हैं।
इसका मतलब है कि ऐप आधारित कैब सेवा के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ी कई डिलीवरी और लॉजिस्टिक सेवाओं को भी अब परिवहन विभाग के नियामकीय ढांचे का पालन करना होगा।
लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था
सरकार ने संबंधित एग्रीगेटर, डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर और ई-कॉमर्स इकाइयों के लिए ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था की है। इसके लिए राज्य परिवहन प्राधिकरण द्वारा विकसित upmyfleet.com पोर्टल का इस्तेमाल किया जा सकता है। लाइसेंस प्राप्त करने के लिए नियमावली में निर्धारित प्रक्रिया और शर्तों का पालन करना होगा।
बिना लाइसेंस संबंधित सेवाओं का संचालन पाए जाने पर संबंधित इकाई के खिलाफ नियमों के अनुसार दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है।
यात्रियों और ड्राइवरों की सुरक्षा पर जोर
नई नियमावली में सिर्फ कंपनियों का लाइसेंस ही नहीं, बल्कि यात्री और ड्राइवर सुरक्षा से जुड़े कई प्रावधान भी रखे गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार एग्रीगेटर से जुड़े चालकों के पुलिस सत्यापन, स्वास्थ्य जांच और अन्य जरूरी मानकों को लागू करने की व्यवस्था की गई है। ड्राइवरों के लिए प्रशिक्षण और सुरक्षा से संबंधित प्रावधान भी नियमों का हिस्सा हैं।
यात्रियों के लिए लाइव लोकेशन शेयरिंग, वाहन ट्रैकिंग और आपात स्थिति में सहायता जैसे सुरक्षा उपायों को भी नई व्यवस्था में महत्व दिया गया है। महिला यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भी विशेष प्रावधान बताए गए हैं।
मनमाना किराया वसूलने पर भी नियंत्रण
उत्तर प्रदेश की 2026 की एग्रीगेटर नियमावली में किराये को लेकर भी प्रावधान किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार ऐप आधारित परिवहन सेवाओं में डायनेमिक या बढ़े हुए किराये को निर्धारित बेस फेयर से अधिकतम 50 प्रतिशत तक सीमित किया गया है। इससे मांग बढ़ने के समय किराये में अत्यधिक बढ़ोतरी पर नियामकीय नियंत्रण का ढांचा तैयार होता है।
नई व्यवस्था का दायरा केवल यात्री सुरक्षा तक सीमित नहीं है। सरकार ने एग्रीगेटर और डिलीवरी सेवाओं से जुड़े वाहनों की निगरानी, प्रदूषण नियंत्रण और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए भी प्रावधान किए हैं।
विशेष रूप से एनसीआर क्षेत्र में वाहन प्रदूषण को लेकर निगरानी महत्वपूर्ण है। केंद्र की वायु गुणवत्ता संबंधी व्यवस्था में भी उत्तर प्रदेश समेत एनसीआर राज्यों को एग्रीगेटर, डिलीवरी और ई-कॉमर्स सेवाओं के लिए व्यापक नीतियां और निगरानी पोर्टल विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं।
कंपनियों की जवाबदेही होगी तय
सरकार का नया लाइसेंस ढांचा ऐप आधारित परिवहन और डिलीवरी सेवाओं को एक औपचारिक नियामकीय व्यवस्था में लाने का प्रयास है। लाइसेंस, वाहन और ड्राइवर संबंधी जानकारी तथा सेवा प्रदाताओं की निगरानी के लिए पोर्टल आधारित व्यवस्था होने से परिवहन विभाग के पास इन सेवाओं से जुड़ा अधिक व्यवस्थित रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।
इससे किसी शिकायत, सुरक्षा घटना या नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित कंपनी या सेवा प्रदाता की पहचान और जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट हो सकती है। हालांकि, वास्तविक असर नियमों के अनुपालन और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।