पुलिसकर्मी बनकर धमकाया, कालकाजी के आस्था कुंज पार्क में नाबालिग से गैंगरेप का आरोप

नई दिल्ली, 22  सितंबर 2026 । दिल्ली के कालकाजी मंदिर के पास स्थित आस्था कुंज पार्क से नाबालिग से गैंगरेप का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि कुछ युवकों ने खुद को पुलिसकर्मी बताकर नाबालिग को धमकाया और इसके बाद उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

मामले में पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी कौन हैं और उन्होंने नाबालिग को किस तरह अपने झांसे में लिया। शिकायत में पुलिसकर्मी होने का डर दिखाकर धमकाने की बात सामने आने के बाद जांच एजेंसियां घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ रही हैं।

  • पुलिस के अनुसार, सोमवार रात करीब 8:45 बजे पीसीआर कॉल के जरिए इस्कॉन मंदिर के पास गैंगरेप की सूचना मिली।
  • पुलिस मौके पर पहुंची और नाबालिग से पूछताछ की। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, नाबालिग दिल्ली की रहने वाली है।
  • शाम करीब 7 बजे दोस्त के साथ कालकाजी मंदिर पहुंची थी। दोनों ने मंदिर में दर्शन किए और करीब 7:30 बजे आस्था कुंज पार्क चले गए।
  • नाबालिग ने पुलिस को बताया कि पार्क में कुछ देर बाद तीन युवक आए।
  • आरोप है कि युवकों ने दोनों को रोककर खुद को पुलिसकर्मी बताया और कार्रवाई की धमकी दी। नाबालिग और दोस्त डर गए।

खुद को पुलिसकर्मी बताकर धमकाने का आरोप

मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू आरोपियों द्वारा खुद को पुलिसकर्मी बताकर नाबालिग को डराने का है। शिकायत के अनुसार, इसी पहचान का इस्तेमाल कर उसे धमकाया गया। जांच के दौरान पुलिस इस दावे की भी पड़ताल करेगी कि आरोपियों ने किस तरह खुद को पुलिसकर्मी के रूप में पेश किया और घटना को अंजाम देने से पहले या बाद में पीड़िता पर क्या दबाव बनाया।

पुलिस घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर सकती है। इसके अलावा आरोपियों की पहचान और घटना में उनकी भूमिका को लेकर भी जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

पुलिस ने शुरू की जांच

मामले की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू की है। जांच में घटनास्थल की जानकारी, प्रत्यक्ष या अन्य संभावित गवाहों, सीसीटीवी फुटेज और उपलब्ध साक्ष्यों को शामिल किया जा सकता है।

नाबालिग से संबंधित मामलों में जांच के दौरान कानूनी प्रक्रिया और पीड़ित की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है। आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई भी जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।

नाबालिग की पहचान सार्वजनिक करना कानूनन प्रतिबंधित

ऐसे मामलों में पीड़िता की पहचान उजागर करना कानून के तहत प्रतिबंधित है। इसलिए खबर में नाबालिग का नाम, फोटो, पता, स्कूल या ऐसी कोई अन्य जानकारी साझा नहीं की जानी चाहिए, जिससे उसकी पहचान सामने आ सके।

फिलहाल पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। आरोपों की पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगी।

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