खबर शेयर करें –
देहरादून। नीट यूजी 2026 की उत्तराखंड राज्य केंद्रीयकृत काउंसलिंग में फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए प्रवेश लेने की शिकायत के बाद सरकार ने जांच तेज कर दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरक्षित श्रेणी का लाभ लेने वाले प्रमाणपत्रों की जांच के निर्देश दिए हैं।
जिला प्रशासन की जांच के बाद अब तक 8 अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र निरस्त किए जा चुके हैं। इनके आधार पर चल रही प्रवेश प्रक्रिया भी रद्द कर दी गई है।


शुरुआत में फर्जी प्रमाणपत्र के इस्तेमाल की शिकायत सामने आई थी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को पूरे मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने के निर्देश दिए। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि कहीं किसी अभ्यर्थी ने गलत जानकारी या कूटरचित दस्तावेज के जरिए आरक्षित श्रेणी का लाभ तो नहीं लिया।
अब जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। अलग-अलग आरक्षित श्रेणियों के तहत लाभ लेने वाले प्रमाणपत्रों का सत्यापन किया जाएगा। जांच के दौरान यदि कोई प्रमाणपत्र फर्जी या कूटरचित पाया जाता है तो उसे निरस्त किया जाएगा। साथ ही संबंधित दोषियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
कुछ अन्य अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों को लेकर भी संदेह सामने आने के बाद जिला प्रशासन स्तर पर जांच चल रही है। सरकार की नजर इस बात पर भी है कि प्रमाणपत्र तैयार करने या जारी करने की प्रक्रिया में किसी स्तर पर अनियमितता तो नहीं हुई।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि फर्जी प्रमाणपत्र के जरिए प्रवेश हासिल करना गंभीर मामला है। सरकार की प्राथमिकता है कि किसी भी योग्य अभ्यर्थी के साथ अन्याय न हो। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
नकल के बाद फर्जी प्रमाणपत्रों पर भी सख्ती
प्रदेश सरकार पहले ही भर्ती परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए सख्त कानून लागू कर चुकी है। अब फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए अनुचित लाभ लेने के मामलों पर भी सरकार ने सख्ती का रुख अपनाया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर प्रवेश लेने की शिकायत सामने आते ही अधिकारियों को पारदर्शी जांच के निर्देश दिए गए थे। जांच के बाद जिन प्रमाणपत्रों को फर्जी पाया गया उन्हें निरस्त किया गया है। अब सभी आरक्षित श्रेणियों के प्रमाणपत्रों की जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
